हर साल की अपेक्षा इस बार पटाखा बाजार में मायूसी दिख रही है, जहां दूकानदार इसकी वजह पटाखे की आसमान छूती कीमतें मान रहे हैं तो वहीं कुछ लोग पर्यावरण को ध्यान में रखकर आई लोगों की जागरूकता को इसकी वजह बता रहे हैं।
पटाखा बाजार में लगी दूकानों पर गौर फरमाएं तो पिछले दो-तीन सालों की अपेक्षा इस बार काफी मायूसी दिख रही है। जहां दीपावली के दो दिन पहले से ही पटाखा बाजार में भीड़ ठसम-ठस हो जाती थी। वहीं इस बार नाममात्र के ही पटाखा खरीदने वाले लोग बाजार की तरफ रूख कर रहे हैं।
पटाखा बाजार में कम बिक्री को लेकर मायूस दूकानदारों का कहना है कि पटाखा की खरीदारी पर महंगाई का असर है। पटाखा दूकानदार पिंटू ने बताया कि हर साल करीब दो से तीन लाख रुपये की पटाखा की बिक्री हो जाती थी। लेकिन अभी तक एक से डेढ़ लाख रुपये का पटाखा ही बिक सका है।
वहीं कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि मोदी की अपील का भी पटाखा बिक्री पर असर पड़ा है। बच्चे जिद्द करने के बाद भी महंगे पटाखे अपने अभिभावकों से नहीं खरीदवा पा रहे हैं।
पटाखा विक्रेता ओमप्रकाश की मानें तो मोदी की हार ने पटाखा की दूकानदारी को काफी नुकसान पहुंचाया ह्रै। अगर यही स्थिति रही तो अगले साल से कम लोग ही पटाखा की दूकान लगाएंगे। कम बिक्री के चलते दूकानदारों को काफी महंगी पड़ रही है।