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शासनादेश के पेच में फंसे बाढ़ पीड़ित

Wed, 31 Aug 2016 08:12 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
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गड़वार स्थित बीआरसी पर बाढ़ पीड़ितों के खाद्य सामग्री का पैकेट शिक्षकों को देते सपा नेता शैलेश चौधरी
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बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जहां प्रदेश सरकार के काबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने जिले में समीक्षा बैठक के दौरान अफसरों को सख्त निर्देश दिया थ। लेकिन शासनदेशों के पेच में बाढ़ पीड़ितों की राहत अधर में लटक गई है। बानगी के तौर पर देखें तो 40 हजार लीटर मिट्टी के तेल में से अब तक मात्र तीन हजार 648 लीटर केरोसिन तेल बांटा गया। 
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बीते दिनों बाढ़ की विभीषिका को देखने आए सूबे के लोक निर्माण एवं बाढ़ एवं आपदा मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने भले ही अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान 20 किलो चावल, 20 किलो आटा, 4 किलो दाल, एक किलो नमक, माचिस सहित अन्य जरुरत के सामान उपलब्ध कराने का फरमान जारी कर दिया। लेकिन शासन स्तर से शासनादेश आया कि बाढ़ पीड़ित उन्हीं को माना जाय जो या तो राहत शिविर में रह रहे हों या शरणार्थी हों।

लेकिन एक दो दिन के भीतर ही दूसरा शासनादेश आया कि बाढ़ से घिरे लोगों को भी बाढ़ पीड़ित मानकर राहत सामग्री दी जाय। अनाज वितरण से पहले जिले के बाढ़ वाले इलाकों के लिए 40 हजार लीटर मिट्टी का तेल आवंटित कर दिया गया। लेकिन शासनादेश में दोबारा जारी फरमान को देखते हुए जिला प्रशासन के अफसरों ने केरोसिन तेल के वितरण पर मौखिक रोक लगा दिया। ऐसे में बैरिया तहसील क्षेत्र में तो करीब तीन हजार लीटर केरोसिन तेल वितरित कर दिया गया।
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जबकि सदर तहसील क्षेत्र में प्रशासन के अफसरों के मौखिक आदेश के पहले मात्र 648 लीटर ही तेल बांटा गया। जबकि बाढ़ प्रभावित इलाके बाढ़ चौकियों के पास अभी तेल ड्रम उसी तरह से पड़ा हुआ है। जिला प्रशासन अब समझ नहीं पा रहा है कि राहत सामग्री किस तरह से बांटा जाय। जबकि लखनऊ में आंदोलन के दौरान लेखपालों की पिटाई के बाद वह भी कार्य न करने का मन बना लिए हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों की कितनी मदद की है। जबकि बाढ़ पीड़ित का सब कुछ गंगा ले जा चुकी है। 
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