कार्तिक एकादशी के दिन रविवार शाम नगवां स्थित गंगातट पर माता तुलसी के साथ भगवान शालीग्राम का विवाह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक रस्मों के साथ हजारों लोगों की मौजूदगी में संपन्न हुआ। विवाह संपन्न होते ही देवी-देवताओं के जयकारों से परिसर गूंज उठा।
क्षेत्र के नगवां गांव स्थित गंगातट पर 16 नवंबर से चल रहे शालीग्राम-तुलसी विवाह यज्ञ समारोह में बक्सर से आए लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी की देखरेख में तुलसी माता का मंडप कंडा और बांस से बनाया गया था। इस मंडप में माता तुलसी का पूरे विधि विधान के साथ शालीग्राम भगवान से हुआ।
विवाह के पुरोहित बिहार के रोहतास जिले के लल्लन पंडित तथा झारखंड के चंद्रकांत पंडित ने संयुक्त रूप से प्रत्येक विवाह संस्कार का वेद मंत्रोच्चार का पाठ किया। इसमें दुल्हन पक्ष की एक दर्जन महिलाओं ने माता तुलसी को नोहकटी, हल्दी लेपन, माटी कोड़, मानर पूजन, कन्यादान आदि किया।
उधर, वर पक्ष से भगवान शालीग्राम की डोली लेकर मां तुलसी के दरवाजे कहरियां डा. बृकेश पाठक, अवध किशोर पाठक, विमल पाठक, राधा किशुन पाठक पहुंचे। जहां कन्या पक्ष की महिलाओं ने बारातियों का स्वागत करते हुए पारंपरिक गीत गाई।
इस अवसर पर कई बार मां तुलसी और भगवान शालीग्राम के जयकारे लगाए गए। इससे वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान सभी बारातियों समेत श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण कराया गया। इस मौके पर अश्वनी उपाध्याय, शिवजी पाठक, प्रधान विनोद गुप्ता, जवाहर पाठक, भुवर पाठक, भरत पाठक, मुन्ना पाठक, राकेश पाठक, प्रियम्वदा पाठक, उर्मिला पाठक, उषा यादव समेत हजारों लोग मौजूद रहे।