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शंकराचार्य के विषय में अमर्यादित शब्द कहना सनातन धर्म का अपमान : रामगोविन्द चौधरी

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बलिया। पूर्व नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राम गोविंद चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि शंकराचार्य के विषय में अमर्यादित शब्द कहना सनातन धर्म का अपमान है। जब बौद्ध धर्म काफी मजबूत हो गया था। उसके अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी तो महान संत कुमार रियुम भट्ट बौद्ध धर्म से शास्त्रार्थ किया और पराजित किया। आदि शंकराचार्य 8 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग कर गुरु की खोज में निकल पड़े और गुरु गोविंद पाद से शिक्षा ग्रहण कर चार वेदों का ज्ञान अर्जित किया। सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में निकल पड़े। उन्होंने ही चार पीठों की स्थापना सनातन को मजबूती प्रदान करने के लिए किया। आज सत्ता के संरक्षण में कुछ अर्द्धज्ञानी शंकराचार्यों पर ओछी टिप्पणी कर हमारे सनातन धर्म को ठेस पहुंचने का कार्य कर रहे हैं, जो अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय हैं।
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उन्होंने कहा कि शंकराचार्य लोग सनातन परंपरा को मानने वाले लोगों के गुरु हैं। वेदों के अनुसार गुरु की निंदा महा पाप हैं। यह पाप बीजेपी कर रही हैं और करा रही है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सभी वेदों के ज्ञाता, विद्वान, और सनातन धर्म के सर्वमान्य संत है। आरएसएस के इशारे पर बीजेपी के लोग हमारी संत परंपरा को धूमिल कर रहे हैं। सरकार को ऐसे स्वघोषित विद्वानों पर अंकुश लगाना चाहिए, अन्यथा सनातन परंपरा को मानने वाले लोग सड़क से सदन तक अपने संत और परंपरा के लिए संघर्ष को बाध्य होंगे।
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