बलिया। पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। मंगलवार को संकटा चतुर्थी का व्रत है। चंद्रोदय रात्रि 8:37 पर हो रहा है इसलिए चंद्रमा को अर्घ्य 8:37 के बाद दिया जाएगा।
इंदरपुर थम्ह्नपुरा निवासी ज्योतिषाचार्य डॉ. अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि भगवान गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। संतान की लंबी आयु और आरोग्यता के लिए इस दिन स्त्रियां व्रत रखती हैं। इस दिन गणपति के पूजन के साथ चंद्रमा को भी अर्घ्य दिया जाता है।
इस दिन सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास रखते हैं। संकट से मुक्ति मिलने को संकटी कहते हैं। माना जाता है कि संकट चतुर्थी का व्रत करने से सभी तरह के विघ्नों से मुक्ति मिल जाती है। चंद्रमा दर्शन वह अर्घ्य के बाद उपवास को तोड़ा जाता है। पूजन व कथा के पश्चात अथर्वशीर्ष का पाठ, गणेश द्वादश नामावली का पाठ करना चाहिए। दिन में या गोधली बेला में गणेश जी के दर्शन अवश्य करना चाहिए। तिल के लड्डू व दूर्वा गणेश जी को अर्पण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस व्रत को करने से व्रत करने वाली महिला को सभी प्रकार के सुख, दीर्घायु पुत्र होता है।