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सैंपलिंग को लेकर अधिकारियों में रार, सैंपलिंग प्रभावित

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जयप्रकाश नगर। संदिग्ध मरीजों का सैंपल लेने की बात को लेकर मुरली छपरा पीएचसी के अधीक्षक डा. देवनीति सिंह और जिला महामारी प्रभारी डॉ. जियाउल हुदा के बीच ठन गई है। इससे सैंपलिंग कार्य प्रभावित हो रहा है। पीएचसी के अधीक्षक का आरोप है कि जिला मुख्यालय की टीम समय से नहीं आती है और बाद में काम जल्द खत्म करने का दबाव बनाया जाता है। सोमवार को पांच मरीज सैंपलिंग के लिए आए थे, लेकिन उनकी सैंपलिंग नहीं की गई। जबकि महामारी प्रभारी ने पीएचसी प्रशासन पर सहयोग न करने का आरोप लगाया है।
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मुरली छपरा पीएचसी के अधीक्षक डॉ. देवनीति सिंह ने बताया कि सोमवार को पौने दो बजे यहां एंबुलेंस पहुंची। इसके बाद देहात के इलाकों में टीम को भेजकर चार लोगों की सैंपलिंग कराई गई। पांच लोगों को मुरली छपरा पीएचसी पर बुलाया गया। इसी बीच अचानक जिला महामारी प्रभारी ने एंबुलेंस चालक को निर्देश दिया कि जितनी सैंपलिंग हुई है, उतने ही सैंपल लेकर आओ। चालक उसे रोकना चाहा तो चालक ने आप रोकने वाले कौन होते हैं, कहते हुए चला गया। डॉ. जियाउल हुदा ने कह दिया तो अब किसी की सैंपलिंग नहीं होगी। डा. सिंह ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस के लौटने पीएचसी पर आए लोगों की सैंपलिंग नहीं हो सकी, जबकि उन्हें देखने से लग रहा था कि ये संक्रमित हो सकते हैं और सभी बुलाने पर आए भी थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. हुदा ने कहा कि मुरली छपरा ब्लाक की दूरी अधिक हो जाती है, इसलिए अब वहां की सैंपलिंग नहीं कराई जाएगी।
उधर, महामारी प्रभारी डॉ. हुदा ने बताया कि जिले में अब तक 943 लोगों की सैंपलिंग हो चुकी है। मुरली छपरा पीएचसी के अधीक्षक जिस दिन सैंपलिंग नहीं कराने का आरोप लगा रहे हैं, उस दिन कुल 144 लोगों की सैंपलिंग कराई गई है। हमें हर हाल में शासन को शाम पांच बजे तक सैंपलिंग की रिपोर्ट भेजनी पड़ती है। इसमें देर होने पर डांट सुननी पड़ती है। इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय से हो रही है, लेकिन मुरली छपरा ब्लाक से कभी भी पूरी तरह सहयोग नहीं किया जा रहा। जितने समय में अन्य ब्लाकों में 20 से 25 सैंपलिंग हो जा रही है, उतने ही समय में मुरली छपरा में चार से पांच सैंपलिंग ही हो पाती है। जिले से एंबुलेंस जाने पर वहां एंबुलेंसकर्मियों को दो से तीन घंटे तक बैठाकर रखा जाता है। मामले में जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने कहा कि वर्तमान समय में टीम वर्क होना चाहिए। यह गंभीर है। दोनोें चिकित्सकों को बुलाकर मामला हल कराया जाएगा।
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मामले में सीएमओ से बात की है। विषम परिस्थितियों में जो कार्य कर रहे हैं, उनकी तारीफ होनी चाहिए, लेकिन कार्य में लापरवाही ठीक नहीं है। इस संबंध में मुख्यमंत्री से बात करेंगे, जो दोषी होगा, सजा पाएगा। स्वास्थ्यकमीं मन लगाकर कार्य करें। उनके कार्य पर सभी की नजर है।-सुरेंद्र नाथ सिंह (विधायक ) बैरिया, बलिया
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