घाघरा में पानी बढ़ने के साथ बाढ़ विभाग के द्वारा टीएस बंधे के बचाव के बाबत कार्य शुरू करा दिया गया। दियारावासियों का कहना है कि यह कार्य तीन महीना पहले शुरू होना चाहिए था। ग्रामीणों में टीएस बंधा जर्जर होने के कारण लोगों में दहशत है। उनका मानना है कि साहिल, चूहे तथा अन्य जमीन में रहने वाले जानवरों की मांद होने के कारण बंधा बिल्कुल जर्जर हो चुका है।
जगह-जगह रेन कट के कारण भी बंधा कमजोर हुआ है। ऐसे में बंधे की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। बीते एक सप्ताह से घाघरा के जलस्तर में धीरे-धीरे वृद्धि होनी शुरू हो गई है। इस वृद्धि के आसपास से ही बाढ़ विभाग द्वारा बंधे पर सुरक्षात्मक कार्य कराए जा रहे हैं।
दतहां प्रधानमंत्री सड़क पर बने स्पर से लेकर तीलापुर के पास स्थित पूर्व प्रधान रामबचन यादव के डेरा तक तीन जगह बाढ़ विभाग द्वारा काम कराया जा रहा है। जिसमें एक जगह नाइलन क्रेट में बोरियां डालकर बंधा की सुरक्षात्मक उपाय किए जा रहे हैं तो दूसरी जगह आसमानपुर प्राथमिक विद्यालय के पास जाली में बोल्डर डालकर टीएस बंधा को कवच पहनाने का काम किया जा रहा है।
तीलापुर निवासी भोला यादव का कथन है कि पिछले वर्ष घाघरा में उफान नहीं था। जिसके कारण बंधा के पर कोई खास दबाव नहीं आया। लेकिन इस वर्ष अच्छी बरसात का संकेत मौसम विभाग द्वारा दिया जा रहा है। घाघरा नदी डेढ़ दर्जन गांवों तथा पुरवों को काटकर रेत में तब्दील कर चुकी है।
50 हजार से अधिक की आबादी अपना गांव छोड़कर बंधा के दक्षिण जहां-तहां शरण लिए हुए हैं या बसे हुए हैं। डेंजर जोन पर दो बार घाघरा ने टीएस बंधे को तोड़ा है। डेंजर जोन से सटे दक्षिण तीलापुर गांव है, तीलापुर के पास कटान विस्थापित लोग दतहां से लेकर रेवती तक बसे पड़े हैं।
नदी यदि अपने तेवर में आती अख्तियार करती है तो अपने उत्तरी तट पर उभरे शील्ट से टकराकर सीधे दतहां प्रधानमंत्री सड़क से होते हुए डेंजर जोन पर खतरनाक हमला करेगी। इसके चलते इस साल बंधा बहुत अधिक संवेदनशील है। जिलाधिकारी राकेश कुमार के दौरा के बाद ग्रामवासियों में एक उम्मीद जगी है कि, लेकिन उनका कहना है कि बंधा के सुरक्षा के बाबत पता नहीं धन बाढ़ विभाग को मिला है कि नहीं।