जिले में कुल 4881 किमी लंबी सड़कों का जाल है। इन सड़कों का निर्माण पीडब्लूडी के अलावा अन्य विभागों की ओर से कराए गए हैं। इसके अलावा जिले में 90 किमी लंबी कोटवां नारायनपुर से मांझी तक एनएच 31 भी है। लेकिन एनएच से लेकर राजमार्ग व अन्य ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें बदहाल हैं। हालांकि एनएच 31 के मरम्मत को लेकर एनएचएआई ने 117 करोड़ के टेंडर की प्रक्रिया पूूरी कर तीन पैकेज में तीन कार्यदायी संस्थाओं को कार्य आवंटित किया है और विभिन्न प्वाइंट पर कार्य शुरू हो चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में भी कुछ सड़कें बनी हैं लेकिन अभी कई सड़कें हैं जहां सड़क की खोदाई के बाद गिट्टी डालकर छोड़ दी गई है।
जिले में कई सड़कों को पुनर्निर्माण के लिए खोदाई की गई। लोगों को उम्मीद जगी कि अब सड़क चकाचक होगी। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण सड़कों पर गिट्टी डाल कर छोड़ दी गई। आलम यह है लोगों को गिट्टी पर चलना मुश्किल भरा काम हो गया है। इन मार्गों पर वाहनों का संचालन भी नहीं हो पाता है।
बैरिया के श्रीनगर तुर्तीपार तटबंध, झरकटहा सम्पर्क मार्ग व झरकटहा भाखड़ सम्पर्क मार्ग पर कार्यदायी संस्था द्वारा महीनों से बड़ी-बड़ी गिट्टियां डालकर छोड़ दी गई है। न तो उस पर रोलर चलाया जा रहा है ना ही छोटी गिट्टियां डाली जा रही हैं। फलस्वरूप उस राह से पैदल चलने वालों को भारी परेशानी हो रही है। इसको लेकर ग्रामीणों ने कई बार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया कि पिच करने में अगर देरी हो तो कम से कम रोलर चलवा दिया जाए ताकि लोगों के आने जाने में सहूलियत हो सके। लेकिन अब भी स्थिति ज्यों की त्यों है।