बलिया। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में चयनित पांच अनुसूचित जाति और जनजाति बाहुल्य गांवों का कायाकल्प टेंडर के पेंच में फंसा हुआ है। समाज कल्याण विभाग ने तीन माह पहले ही कार्यदायी संस्था को एक करोड़ की धनराशि उपलब्ध करा दी थी। इन गांवों को शासन की ओर से संचालित सभी तरह के विकास और लाभार्थीपरक योजनाओं से संतृप्त किया जाना है। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने इस बाबत कार्यदायी संस्था को जल्द कार्य शुरू कराने का निर्देश दिया है।
जिले की अनुसूचित जाति और जनजाति बाहुल्य पांच गांवों को प्रधानमंत्री आदर्श गांव योजना के तहत करीब चार माह पहले चयन किया गया। शासन ने इन गांवों में ग्राम स्वराज अभियान के तहत चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनने उसका निस्तारण करने के साथ ही गांवों में पूर्व में कराए गए विकास कार्यों की पड़ताल करते हुए अधूरे कार्यों को पूरा कराने और सभी तरह के विकास कार्यों से संतृप्त करने का प्रावधान किया। इन गांवों को विभिन्न योजनाओं से संतृप्त करने के लिए बतौर नोडल समाज कल्याण विभाग को नामित करते हुए प्रति गांव 20 लाख की धनराशि भी उपलब्ध करा दी। इसके बाद, विभाग ने शासन की ओर से नामित कार्यदायी संस्था सीडको को धनराशि उपलब्ध कराते हुए चयनित गांवों में कार्य कराने की जिम्मेदारी दी लेकिन तीन माह बाद इन गांवों में कोई भी विकास कार्य शुरू नहीं हो सका है। बताया जाता है कि सीडको की ओर से विकास कार्यों से संबंधित टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है।
यह गांव हैं चयनित
ब्लॉक गांव
रसड़ा महतवार
रसड़ा रजमलपुर
रसड़ा रौआचवर सरया
रसड़ा अखनपुरा
सोहांव शहाबुद्दीनपुर
इन योजनाओं से होना है संतृप्त
गांव को पक्की सड़क से जोड़ना।
सभी पात्रों का शौचालय निर्माण।
आवंटित आवासों का निर्माण पूरा कराना।
बच्चों का स्कूलों में नामांकन।
सभी पात्र परिवारों पीएम आवास का आवंटन।
सभी ग्रामवासियों के लिए सुरक्षित पेयजल सुविधा।
गर्भवती महिलाओं का संस्थागत प्रसव।
बच्चों का पूर्ण टीकाकरण।
सभी पात्रों को पेंशन योजनाओं से आच्छादित करना।
शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सार्वजनिक उपभोग पर प्रतिबंध।
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित पांच गांवों को विभिन्न योजनाओं से संतृप्त करने के लिए धनराशि सीडको को उपलब्ध कराई जा चुकी है। सीडको की ओर से टेंडर प्रक्रिया अभी पूरी नहीं की गई है। इस बाबत कार्यदायी संस्था को जल्द कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। - अभय कुमार सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी, बलिया