बलिया जेल के बाहर पुलिस के आला अधिकारी
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शनिवार को 18 बसों से 591 बंदियों को भेजा गया था। शेष बंदियों ने किसी तरीके से एक रात पानी के बीच काटी। रविवार सुबह एक बार फिर बंदियों के भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। 13 बसों से 383 बंदी भेजे गए। कुल 641 बंदियों को आजमगढ़ भेजा गया है जिसमें 31 महिलाएं शामिल हैं।
वहीं, अंबेडकरनगर भेजे गए 333 बंदियों में भी 30 महिलाएं शामिल हैं। सभी बंदियों को सुरक्षित अन्य जिलों के जेलों में भेजने के बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली। इस दौरान डीआईजी अखिलेश कुमार, एसपी राजकरन नय्यर, एएसपी संजय कुमार व सीओ सिटी भूषण वर्मा के साथ बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौजूद रही।
बलिया जिला कारागार में पानी भरने की ये कोई नई घटना नहीं है। वर्ष 2019 में भी जिला कारागार के जलमग्न होने से 863 बंदियों को आजमगढ़ और अंबेडकरनगर की जेलों में स्थानांतरित किया गया था।
जलभराव और अंग्रेजों के जमाने की जेल के स्थान पर बलिया में नई हाई सिक्योरिटी जेल बनाने की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है, लेकिन भूमि नहीं मिलने से अभी इस पर काम नहीं शुरू हो सका है। बलिया जेल में क्षमता से अधिक बंदी होने के कारण जहां जेल प्रशासन को समस्या झेलनी पड़ती है वहीं बरसात के दिनों में जेल के अंदर पानी लगने के कारण बंदियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।
मुख्य सड़क से जेल का लेवल नीचे होने के कारण यह समस्या होती है। जेल के पीछे स्थित श्रीराम विहार कॉलोनी का लेवल बहुत नीचे था। धीरे-धीरे यहां आवास बनते गए और लोग अपने मकानों का लेवल ऊंचा करते गए। जेल का लेवल नीचे होता गया । जेल के सामने से गुजर रहे नाले से अन्य कॉलोनियों व मोहल्लों का पानी निकलता है। जेल में पानी लगने का बड़ा कारण यह भी है।