रबी की मुख्य फसल गेहूं में चपत खाने के बाद बरसाती जल भराव के चलते पुन: किसानों को जबर्दस्त चोट पहुंची है। रेवती रेल लाइन के दक्षिण में जल भराव से करीब 400 बीघे मक्का के खेत जलमग्न हैं।
एक फीट से लेकर दो फीट तक बरसात का पानी पूरे क्षेत्र में फैला पड़ा है। किसानों ने श्रमदान कर खेतों में जमे पानी को निकालने की व्यवस्था की है।
रेवती रेल स्टेशन के दक्षिण विशनपुरा और खदरा मौजाओं की जमीन आम तौर पर नीचे है। हर बरसात में लगभग जलभराव का होना आम बात है।
बीते अप्रैल के अंत में इस क्षेत्र के जल भराव की निकासी के लिए पैनी नाला की गहराई की गई थी। किसानों का कहना है कि विशुनपुरा खदरा के मुहाने पर लगभग तीन सौ मीटर तक कायदे की गहराई नहीं की जा सकी।
यह नाला खदरा तथा विशनुपरा के जमे हुए पानी के निकलने में सहायक है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के कारण अधिकांश किसानों ने मक्का की फसल की बुआई की थी।
अब जल भराव हो गया तो पानी निकलने के बजाय रूका पड़ा है। किसानों ने सोचा कि अगर तीन स्थानों से मिट्टी को काट दिया जाए तो खेतों का पानी काफी हद तक निकल सकता है।
किसानों ने फावड़ा आदि लेकर विशुनपुरा खरा के मुहाने पर कनक पांडेय के खेत के उत्तर तथा रेवती पचरूखिया मार्ग पर छेड़ी के सामने स्थित पुलिया के दोनों ओर सफाई की।
इससे क्षेत्र के कुछ किसानों को राहत मिल सकती है। वैसे ज्योतिषीय गणना के हिसाब से पुरवा नक्षत्र में अच्छी-खासी बरसात की भविष्यवाणी की गई है। इससे किसान सकते में हैं।
प्रवीण ओझा, श्रीकांत पांडेय, बड़े पांडेय, मुन्ना यादव, केवन, विनोद पांडेय, हरेंद्र सिंह, छितेश्वर राजभर इससे निजात दिलोन के जिला प्रशासन से गुहार लगाई है।