बलिया। कोरोना संक्रमण के नए मामलों में कमी को देखते हुए शासन ने 16 अगस्त से कक्षा 9 से 12 वीं तक के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों को खोलने का निर्देश दिया था। सरकार ने फिलहाल 50 प्रतिशत हाजिरी के साथ स्कूल खोलने की इजाजत दी है। सोमवार को स्कूल तो खुले लेकिन छात्रों की संख्या काफी कम रही। शासन से नामित नोडल अधिकारी एवं डॉयट बलिया के प्राचार्य विकायल भारती ने कई स्कूलों का जायजा लिया। बैरिया व सदर तहसील में बाढ़ के चलते करीब 50 स्कूल नहीं खुल सके।
कोरोना के चलते महीनों से स्कूल-कॉलेज की बंदी के बीच घरों में कैद छात्र-छात्राओं को अब एक बार फिर कक्षाओं में जाने का मौका सोमवार से मिल गया। इस मौके का वे लम्बे समय से इंतजार कर रहे थे। सभी बोर्डों के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परिणाम घोषित होने के बाद एक जुलाई से ही नामांकन प्रकिया भी स्कूलों में शुरु है। 16 अगस्त से कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए पठन-पाठन शुरु करने का निर्देश ताकि छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो। सोमवार को स्कूल तो खोल दिए गए लेकिन छात्रों की संख्या काफी कम रही। प्रभारी डीआईओएस अतुल तिवारी की मानें तो अभी भी अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर पूरा उत्साहित नहीं है। हालांकि पहले दिन अभिभावकों की अनुमति व मॉस्क पहन कर आने वाले छात्रों को प्रवेश दिया गया। स्कूलों पर सैनिटाइजर आदि के इंतजाम रहे।
मॉस्क के बाद हाथों को कराया सैनिटाइज
बांसडीह। कोरोना संक्रमण को देखते हुए लंबे समय से स्कूल बंद थे। सोमवार को कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यालयों को खोला गया। विद्यालय प्रबंधन द्वारा शासन से जारी कोरोना संक्रमण के बचाव के निर्देशों को पालन करते हुए देखा गया। बांसडीह मनियर रोड पेट्रोल पंप के समीप किड्जी कैरियर स्कूल में बच्चों को मॉस्क लगाने के बाद प्रवेश दिया गया और बच्चों के हाथ सैनिटाइज करवाए गए। कक्षाओं में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए बच्चो की पढ़ाई शुरु की गई। वहीं, कस्बा स्थित अंकुर पब्लिक इंटर कॉलेज में बच्चों को विद्यालय परिसर में प्रवेश के दौरान ही सैनिटाइजर से हाथों की सफाई, मॉस्क की अनिवार्यता, क्लॉस रूम में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए पठन पाठन का कार्य शुरु किया गया। पहला दिन होने के चलते बच्चों की संख्या बहुत ही कम नजर आ रही थी। वही, विद्यालय प्रबंधन व गुरुजन अपने बीच बच्चों को पाकर काफी खुश दिख रहे थे और बच्चों के चेहरे खिले हुए थे।
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सरकारी स्कूलों में दिखी लापरवाही
नगरा। कोरोना के कारण बन्द पड़े माध्यमिक विद्यालयों के प्रांगण में करीब पांच माह बाद सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति नगण्य देखी गई, वहीं निजी स्कूल बच्चों से गुलजार दिखे। विद्यालयों में कोरोना को लेकर सतर्कता पर केवल खानापूर्ति देखने को मिली। सैनिटाइजर व मॉस्क कुछ ही विद्यालयों पर उपलब्ध रहे।
कोरोना के पॉजिटिव केस के घटते हालात को देखते हुए प्रदेश सरकार ने कोरोना गाइडलाइन के तहत माध्यमिक विद्यालयों को 16 अगस्त से खोलने का आदेश दे दिया। लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि कोरोना महामारी को विद्यालय व बच्चे दोनों ही हल्के में ले रहे हैं। बिना मॉस्क व सैनिटाइजर की तैयारी के ही विद्यालय खोल दिए गए। बच्चे तो दूर अध्यापक भी कुछ खास गम्भीर दिखाई नहीं दिए।
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कोराना नियमों का पालन करते हुए शुरु हुआ पठन-पाठन
नरहीं। काफी दिनों के बाद सोमवार को विद्यालय पहुंचे बच्चों में पढ़ाई को लेकर काफी उत्सुकता देखी गई। इलाके के अधिकांश विद्यालयों में बाढ़ का पानी होने की वजह से शिक्षण कार्य अभी शुरू नहीं हो पाया है। लेकिन जो विद्यालय बाढ़ में नहीं डूबे हैं सोमवार से शिक्षण कार्य प्रारंभ हो गया। गोविंदपुर भरौली के स्वामी सहजानंद इंटर कॉलेज, सोहांव में राधिका इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों के तहत बच्चों को थर्मल स्कैनिंग की गई। मॉस्क के साथ प्रवेश के समय सैनिटाइजर से हाथ साफ कराया गया और फिर पठन-पाठन शुरू हुआ। काफी दिनों के बाद गुरु और शिष्य का मिलन काफी उत्साहजनक रहा।
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स्कूल पहुंचे छात्रों का किया स्वागत
गड़वार। द होराइजन स्कूल ने सोमवार को 9 से 12वीं तक के छात्रों का स्वागत किया। इस दौरान कोविड प्रोटोकॉल का विशेष ध्यान रखा गया। प्रधानाचार्य एस सिंह ने बच्चो को उपहार देकर मॉस्क व अन्य जरूरी सावधानियों के प्रति बच्चों में जागरुकता हेतु निर्देश दिया। समन्वयक अल्का शर्मा के निर्देशन में स्पेशल एसेंबली का भी आयोजन किया गया। सभी शिक्षको द्वारा बच्चों पर फूल बरसाया गया।