बलिया। होटल, मैरिज होम व गेस्ट हाउस को भूजल के इस्तेमाल का हिसाब देना पड़ेगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। हिसाब नहीं देने वालों की बोरिंग बंद कर दी जाएगी।
होटल, मैरिज होम व गेस्ट हाउस भूगर्भ जल का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। इससे भूजल स्तर गिर रहा है। लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एनजीटी के आदेश के अनुसार अब हर होटल व मैरिज होम संचालक को जल दोहन के लिए भूगर्भ जल विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है। उनको रेन वाटर हार्वेस्टिंग का भी प्रबंध करना होगा। एनजीटी ने भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन पर रोक लगाने जिला प्रशासन को तीन सदस्यीय कमेटी बनाने के आदेश दिया हैं।
होटल व मैरिज की बोरिंग पर टेलीमेट्री के साथ इक्ट्रो-मैग्नेटिक फ्लो मीटर लगाना होगा। इस मीटर से यह पता चलेगा कि कितना जल दोहन किया जा रहा है। टेलीमेट्री के माध्यम से भूगर्भ जल विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भूगर्भ जल के स्तर की ऑनलाइन निगरानी करेगा। लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता श्याम सुंदर यादव ने बताया कि भूगर्भ जल दोहन के लिए प्रमाणपत्र नहीं लेने वाले की बोरिंग सील की जाएगी और पर्यावरण को क्षति पहुंचाने पर जुर्माना भी वसूल किया जाएगा।
बोरिंग से पहले किसान कराये पंजीकरण
खेती के लिए बोरिंग कराने के लिए किसानों को भी पंजीकरण कराना होगा। बेवसाइट पर पंजीकरण कराने के बाद अपने ब्लाक के लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता के पास आवेदन करते समय किसान के द्वारा दिये गये प्रपत्र की प्रति जमा करानी होगी। राजिस्ट्रेशन के लिए ग्राम प्रधान का प्रस्ताव, पीएम किसान पोर्टल पर पंजीकरण, खसरा-खतौनी, आधार व फोटो आदि अभिलेखों की जरूरत होगी।