बलिया। सपा से विधानसभा का टिकट मांगने वाले अधिकतर नेता ब्लॉक प्रमुख का प्रत्याशी ढूंढने में नाकाम रहे। कई नेता तो कहीं दिखाई ही नहीं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई क्षेत्रों में कुछ नेता तो भाजपा उम्मीदवार की मदद करने में जुटे रहे। इस मामले में भाजपा की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है। मिशन 2022 की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी भी चार क्षेत्र पंचायतों में ब्लाक प्रमुख का उम्मीदवार नहीं तलाश पाई। जिन 13 सीटों पर पार्टी ने उम्मीदवार खड़ा किया, उनमें से करीब 60 फीसदी ही अपने पाले में कर पाई। मिशन 2022 की तैयारी में जुटे दोनों प्रमुख दलों सपा और भाजपा के लिए यह परिस्थिति उत्साहजनक नहीं मानीं जाएगी।
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कोई ऐसा विधानसभा क्षेत्र नहीं है, जहां से पांच से छह की संख्या में सपा के दावेदार न हों। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सफलता के बाद सपा नेताओं का उत्साह ब्लॉक प्रमुख चुनाव में ठंडा पड़ गया। जनपद की दो लोकसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में बासंडीह में सपा और रसड़ा में बसपा के विधायक हैं। बाकी विधानसभाओं में भाजपा का कब्जा है। जानकारों का मानना है कि मुख्य विपक्षी पार्टी होने के नाते वर्तमान परिस्थितियां सपा के लिए अनुकूल हैं। फिर भी ब्लॉक प्रमुख चुनाव में संघर्ष से परहेज करते हुए विधानसभा के अधिकतर दावेदार घर से बाहर ही नहीं निकले। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के नामांकन के दौरान कुछ नेताओं पर पुलिस ने केस दर्ज किया और दबिश दी। इससे कई नेता जिले से बाहर रहने लगे। हालांकि नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी, पूर्व मंत्री नारद राय, पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी, पूर्व विधायक संग्राम सिंह जैसे कई ऐसे भी नाम हैं, जो चुनाव में लगे रहे। ब्लॉक प्रमुख चुनाव में सपा को 17 ब्लाक में सिर्फ छह उम्मीदवार ही मिल सकें। उसमें भी नवानगर के उम्मीदवार ने अपना नाम वापस ले लिया। बाकी 10 विकास खंडों रेवती, बांसडीह, पंदह, मनियर, सीयर, बैरिया, मुरलीछपरा, गडवार और हनुमानगंज में पार्टी को प्रत्याशी ही नहीं मिलें।
पहली बार 8 सीटों पर खिला कमल, फिर भी आधे से रहे कम
बलिया। दो सांसद, दो मंत्री और तीन विधायक वाले जनपद में भाजपा ने पहली बार ब्लाक प्रमुख के 8 सीटों पर कमल तो खिलाया फिर भी आधे से कम रह गए। इससे पार्टी के विधानसभा चुनाव की तैयारी पर सवालिया निशान लग रहे हैं। मिशन 2022 की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी भी कई क्षेत्रों में ब्लाक प्रमुख का उम्मीदवार नहीं तलाश पाई। जिन 13 सीटों पर पार्टी ने उम्मीदवार खड़ा किया, उनमें से आठ ही अपने पाले में कर पाई।
भाजपा सत्ता के दम पर गुंडई पर उतारू हो गई थी। सभी विकास खंडों में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ने वालों को धमकी दी गई। इसने लड़ने का प्रयास किया, उस पर फर्जी केस दर्ज कर धमकी दी गई। इसी वजह से ऐसा हुआ। इसके बावजूद जिले में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में सपा ने उम्दा प्रदर्शन किया है। - राजमंगल यादव, सपा जिलाध्यक्ष