बसपा से त्याग पत्र देने वाले पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने रविवार को कहा है कि उन्होंने फिलहाल बसपा की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दिया है। उन्होंने भविष्य के कदम को लेकर अभी कोई फैसला नहीं किया है। समाजवादी पार्टी में घर वापसी के मुद्दे पर कहा कि घर वापसी हमेशा सुखद होती है, लेकिन वह उचित समय पर अपने समर्थकों से बातचीत करने के बाद अपने फैसले की जानकारी देंगे।
इधर, सपा के संस्थापक पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के करीबी रहे कद्दावर नेता रहे अंबिका चौधरी के बसपा छोड़ने के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पुन: साइकिल की सवारी कर सकते हैं। हालांकि इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है। अब देखना कि भाजपा अपना उम्मीदवार किसे बनाती है। इसके साथ ही 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर बहस अभी से छिड़ गई है।
आनंद चौधरी को जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी बना और उनके पिता पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी के भी सपा में शामिल कराने का संकेत देकर सपा ने ये साबित कर दिया है कि उसने बलिया में पार्टी के खोए जनाधार को वापस पाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। निश्चित तौर पर अंबिका चौधरी की वापसी से जनपद में सपा को काफी बल मिलेगा।
सपा सूत्रों की मानें तो एक-दो दिन में अंबिका चौधरी भी सपा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बलिया के फेफना विधानसभा से टिकट कटने से नाराज पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने सपा से इस्तीफा दे दिया था और बसपा में शामिल हो गए थे। मायावती ने उन्हें फेफना विधानसभा सीट से प्रत्याशी भी बनाया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन से बलिया सीट से सनातन पांडेय चुनाव लड़े। इसमें अंबिका चौधरी ने सपा प्रत्याशी का साथ दिया था। अंबिका चौधरी करीब दो दशक तक बलिया के कोपाचीट (वर्तमान में फेफना) विधानसभा क्षेत्र की अगुवाई कर चुके हैं। उनके बसपा से इस्तीफे के बाद जिले की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।