बलिया। आजादी के बाद पिछले 74 वर्षों में जिले के राजनीतिक परिदृश्य में अमूल-चूल परिवर्तन आया है। इस दौरान जहां कई विधानसभाएं अब अतीत का हिस्सा हो चुकी हैं वहीं, परिसीमन के बाद कई नई विधानसभाएं अस्तित्व में आई हैं। विधानसभाओं के बदलने के साथ मतदाताओं का मिजाज भी बदला कभी कोई सीट लगातार कांग्रेस से पास रही तो कभी उसे ही उस सीट पर जनाधार की तलाश करनी पड़ रही है। मतदाताओं ने अपने रुचि के हिसाब से यहां समय के साथ दलों को प्रतिनिधित्व का मौका दिया।
आजादी के बाद वर्ष 1952 में पहली बार जनपद में विधानसभा के चुनाव कराए गए। उस समय जनपद में कुल सात विधानसभा सीट थी। इसमें बलिया ईस्ट, बलिया सेंट्रल, बलिया नार्थ-ईस्ट कम बांसडीह साउथ-वेस्ट, बांसडीह वेस्ट, बांसडीह सेंट्रल, रसड़ा ईस्ट कम बलिया साउथ-वेस्ट, रसड़ा वेस्ट पर चुनाव हुआ था। कुछ वर्ष बाद परिसीमन में इसमें कई सीटें बदल गई। 1957 में हुआ अगला चुनाव भी सात विधानसभा सीटों पर हुआ, लेकिन उनके नाम बदले हुए थे। इस बार कोपाचिट, बलिया, द्वाबा, बांसडीह ईस्ट-बांसडीह वेस्ट, सिकंदरपुर और रसड़ा विधानसभा सीट पर चुनाव कराए गए। इस चुनाव में रसड़ा विधानसभा सुरक्षित थी।
1962 के चुनाव में हो गईं आठ विधानसभा सीटें
बलिया। प्रदेश में अगला आम चुनाव 1962 में हुआ। इस विधानसभा चुनाव में जनपद की विधानसभा सीटें बढ़कर आठ हो गईं। इस बार रसड़ा (सुरक्षित), सीयर, सिकंदरपुर, बांसडीह वेस्ट, बांसडीह ईस्ट, द्वाबा, बलिया और कोपाचिट विधानसभा सीट शामिल थी। इसमें सीयर विधानसभा नई बनी थी। वर्ष 1967 के चुनाव में भी आठ विधानसभाएं ही रहीं, लेकिन चिलकहर के नाम से एक नई विधानसभा अस्तित्व में आई। इस वर्ष जिन विधानसभाओं में चुनाव हुआ उसमें रसड़ा सुरक्षित, सीयर, चिलकहर, सिकंदरपुर, बांसडीह, द्वाबा, बलिया, कोपाचिट शामिल थीं। बांसडीह के नाम से दो विधानसभाओं का दौर यहां से समाप्त हो गया। ये स्थिति वर्ष 2007 के चुनाव तक बरकरार रही।
2012 में फिर हो सात विधानसभा सीटें
बलिया। परिसीमन के बाद वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव हुए तो जनपद की विधानसभा सीटों का परिदृश्य एकदम बदला हुआ था। इस विधानसभा चुनाव में जनपद की विधानसभा सीटें एक बार फिर घट कर सात हो गई। रसड़ा विधानसभा सीट सुरक्षित से हटकर सामान्य हो गई। चिलकहर विधानसभा सीट का अस्तित्व समाप्त हो गया। इसका कुछ हिस्सा रसड़ा, कुछ सिंकदरपुर और कुछ बेल्थरारोड में जुड़ गया। कोपाचिट विधानसभा सीट का नाम बदलकर फेफना हो गया। सीयर विधानसभा सीट का नाम बदलकर बेल्थरारोड विधानसभा हो गया। इसे सुरक्षित घोषित कर दिया गया। द्वाबा अब बैरिया विधानसभा के नाम से जानी जाने लगी। इसके साथ ही सीयर का कुछ हिस्सा सिकंदरपुर, सिकदरपुर का कुछ हिस्सा बांसडीह, बांसडीह का कुछ हिस्सा बैरिया विधानसभा से जुड़ गया। इससे सभी विधानसभाओं का भूगोल बदल गया।