बलिया। जिले के बांसडीह तहसील के मैरीटार गांव निवासी प्रगतिशील किसान जय प्रकाश पांडेय परंपरागत खेती को छोड़कर विभिन्न तरीके की सहफसली खेती कर रहे हैं। इससे एक ओर जहां आय में इजाफा हो रहा है वहीं अन्य किसानों में खेती को लेकर हौसला भी बढ़ रहा है। वह एक बीघे से अधिक रकबे में नींबू की खेती करते हैं और इस खेत को सब्जी की खेती के लिए तुरहा को प्रति बीघे के हिसाब से लगान पर भी देते हैं। हाल ही में राज्यपाल ने भी उन्हें सम्मानित किया है।
जयप्रकाश पांडेय ने खेती के पीछे एक रोचक कहानी बताई। बताया कि वर्ष 2001 में उच्च न्यायालय इलाहाबाद गया हुआ था। सिविल लाइन में एक रिश्तेदार की दुकान पर बैठा था। वहां एक मित्र से मुझे पांच नींबू मिले। पांचों नींबू का पांच तरह अचार बना कर दूसरे दिन दिखाया तो वह काफी प्रसन्न हुए और मुझसे अचार ले लिया और दो नींबू के पौधे दिए। एक पौधा मेरे रिश्तेदार ने ले लिया और दूसरा लेकर गांव आया और अपने घर के बगल में लगा दिया। नींबू उसी वर्ष से फल देने लगा। फल इतने अधिक थे कि मैं अपने उपयोग से अधिक नींबू को बांटने लगा। नींबू का फल देखने के बाद आसपास के लोग पौधे की मांग करने लगे। फिर मैंने रूटेक्स मॉस ग्रास के उपयोग से 51 पौधे तैयार किए। 30 नींबू के पौधे मैंने लोगों को दे दिए 20 नींबू के पौधे बच गए। दो वर्ष तक किसी व्यक्ति ने पौधों की मांग नहीं की तो पौधों को जीवित रखने के लिए घर के नाली किनारे उन्हें लगा दिया। यह फल देने लगे जिसे मैं बांट दिया करता था। यह सिलसिला 2010 तक चला।
इसी वर्ष पूर्व सेल टैक्स कमिश्नर मित्र मेरे यहां आए। मेरे घर के पास जलकल विभाग का पाइप फटा था और पानी 100 मीटर दूर गड्ढे में गिर रहा था। उन्होंने मेरे पुत्र के साथ मिलकर पानी को नींबू की तरफ मोड़ दिया। पानी के प्रभाव से सूखे हुए नींबू में नए जीवन का संचार हुआ वह फल भी अत्यधिक देने लगे। फल अधिक होने के कारण इसे बेचने का निर्णय लिया। यहीं से आमदनी का सिलसिला शुरू हुआ और अत्यधिक नींबू को बेचना शुरू किया। वर्ष 2014 में 18500 रुपये का नींबू बेचा। यह देख निर्णय लिया कि घर के समीप डेढ़ बीघा भूमि नींबू की खेती करेंगे। वर्ष 2015 में एक बीघा खेत में नींबू के पौधे लगाए। मार्च 16 में प्रत्येक पौधे में 50 से 90 तक फल निकले। इसके बाद निर्णय लिया कि बांसडीह रोड पर जो खेत हैं इसमें व्यवसायिक खेती करेंगे। इसके लिए इलाहाबाद बैंक से आठ लाख रुपये का टर्म लोन लिया और जुलाई 16 में तीन एकड़ में नींबू लगाया। जब नींबू फल देने लगे तो इस खेत को तुरहा की सब्जी की खेती करने के लिए प्रति बीघे लगाने को दे दिया। वर्ष 2017 में नींबू के पौधे में हर वर्ष फलों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे करीब 15 से 20 हजार रुपये में प्रति बीघे का नींबू बिक जाता है। अब तो सब्जी बेचने वाले खेतों में ही आकर नींबू की खरीदारी करते हैं।
मधुमक्खी पालन क्षेत्र में भी हाथ आजमाया
प्रगतिशील किसान जयप्रकाश पांडेय का वर्ष 18 में प्रदेश जैव ऊर्जा बोर्ड से संपर्क हुआ। उनकी सहायता से सहारनपुर में मधुमक्खी पालन की जानकारी ली। इसके बाद 50 बॉक्स से मधुमक्खी पालन शुरू किया। कमाई का एक जरिया यह भी हो गया है।
जलभराव को देख अब करेंगे कमल व सिंघाड़े की खेती
पिछले कई वर्षों से इस इलाके में जलभराव एक समस्या बन गई है। समय से जल निकासी नहीं होने के कारण परंपरागत खेती समय से नहीं हो पा रही है। इसका भी निदान उन्होंने खोजा है। अब वह कमल व सिंघाड़े की खेती कर किसानों को उत्साहित करेंगे। बताया कि अपने यहां पांच व सात फुट गड्ढा करके उसमें पानी भर के सिंघाड़े व कमल के फूल की खेती के लिए बीजों की तैयारी कर रहे हैं। किसानों केे बीज भी यहां मुहैया कराएंगे। बताया कि परंपरागत खेती से कई गुना अधिक यह फायदेमंद होगी।