शनिवार को गंगा की कटान से बेघर हुए जगदीशपुर गांव के लोग दूसरे के घरो में रहकर जीवनयापन कर रहे हैं। वहीं कटान के मुहाने पर खड़े घरों के सामान निकाल कर खेतो व दूसरे के दरवाजे पर रखे है । ये लोग सामान अभी डर से अपने घरों में नहीं ले जा रहे हैं।
क्षेत्र के जगदीशपुर गांव में गंगा की कटान से दर्जनभर परिवारों का आशियाना गंगा में समाहित हो गया है, जिससे कटान से बेघर हुए लोग दूसरे के घरों में रहकर अपना ठिकाना खोज रहे हैं।
कोई सरकारी सहायता की राह देख रहा है तो कोई किराये का मकान खोज रहा है। कटान के मुहाने पर रह रहे लोग भी दहशत में है और अपने घर से निकाले सामानों को घर न ले जाकर खेतों में या दूसरे के दरवाजे पर रखे हुए हैं। गांव के लोग आस लगाये बैठे हैं कि कोई अधिकारी हमारे यहां आकर हम लोगों की हालत देखे लेकिन लेखपाल व ग्राम प्रधान को छोड़कर कोई अधिकारी 48 घंटे बीत जाने के बाद भी नहीं पंहुचा।
उधर, जगदीशपुर के किसान, बाढ़ पीड़ित सोमवार को भूमिहार समाज के महामंत्री सत्येन्द्र राय से मिले तथा प्रशासन की तरफ से राहत कार्य नहीं किए जाने संबंधी समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि कटान पीड़ितों की सुध लेने कोई नहीं आ रहा है। गंगा के कटान में एक के बाद एक आशियान गिरता जा रहा है लेकिन बचाव व राहत कार्य के नाम पर प्रशासन अभी भी उदासीन बना है। इस मौके पर देवानंद पांडेय, सुरेंद्र पांडेय, मिथिलेश कुमार पांडेय, विवेक पांडेय, परशुराम पांडेय आदि मौजूद रहे।