बलिया। अक्सर देखने को मिलता है कि गांव और कस्बों में कोई भी बड़ी आसानी से कीटनाशक की दुकान खोल लेता है। इसके लिए दुकानदार के पास कोई डिग्री भी नहीं होती। वहीं कीटनाशक कंपनियां भी सिवाय लागत के दुकानदार से डिग्री के बारे में नहीं पूछतीं। परंतु अब सरकार के नए नियम से ऐसा नहीं होगा।
नए नियम के मुताबिक, अब दुकानदार के पास कृषि विज्ञान, रसायन शास्त्र, प्राणी विज्ञान या वनस्पति विज्ञान से संबंधित स्नातक डिग्री किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से आवश्यक होगी। जिन व्यापारियों के पास यह डिग्री नहीं है, उन्हें एक वर्ष का डिप्लोमा कोर्स करना होगा। विभाग के मुताबिक, जिले में करीब 100 कारोबारियों का लाइसेंस इस नए नियम में फंस सकता है। जनपद में करीब 921 कीटनाशी बिक्री लाइसेंसधारक हैं, जिनमें करीब 100 लाइसेंसधारकों के पास कृषि विज्ञान या जैव रसायन आदि अधिमानी अर्हता नहीं है। लिहाजा इन व्यापारियों को किसी सरकारी या मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से कृषि या बागवानी में संबद्ध विषय से, जिसमें वनस्पति संरक्षण व नाशक जीवमार प्रबंध के संबंध में विषय वस्तु का पाठ्यक्रम शामिल हो, एक वर्षीय डिप्लोमा करना होगा अन्यथा की स्थिति में उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार ने बताया कि ऐसे लाइसेंस धारकों को कृषि मंत्रालय भारत सरकार के निर्देश पर एनआईपीएसएम हैदराबाद द्वारा संचालित संस्थाओं के माध्यम से सर्टिफिकेट कोर्स ऑन इंसेक्टीसाइड मैनेजमेंट(सीसीआईएम) योजना के तहत शार्ट टर्म डिप्लोमा कराया जा रहा है। बताया कि लक्ष्मी जन कल्याण सेवा संस्थान मुरादनगर गाजियाबाद को एनआईपीएचएम के द्वारा नामित किया गया है। इसलिए सभी लाइसेंसधारक 12 सप्ताह का डिप्लोमा करने के लिए कार्यालय में तुरंत संपर्क करें। उन्होंने बताया कि एक जनवरी 2022 के बाद कोई भी विक्रेता बिना शैक्षिक योग्यता या डिप्लोमा के कीटनाशक रसायनों की बिक्री करते हुए पाया जाता है, तो उसका कीटनाशक बिक्री लाइसेंस निरस्त करते हुए विधिक कार्रवाई की जाएगी।