बलिया। समन्वित बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत मार्च और अप्रैल में जिले में लगभग 301 पदों के सापेक्ष 286 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति हुई। लेकिन नियुक्तियाें में अनियमितता का सिलसिला थम नहीं रहा। अब तक पांच नियुक्तियों में फर्जी पाई गईं। बृहस्पतिवार को मुख्य विकास अधिकारी ने दो और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्तियां अनियमितताओं के कारण निरस्त कर दी। इनमें एक मनियर ब्लॉक के चिटौनीय गांव की अन्नू शर्मा है।
इनके खिलाफ सीडीओ को शिकायत मिली थी कि गांव के ही केंद्र पर इनकी माता आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर कार्यरत हैं, जो नियमानुसार अनुमन्य नहीं है। शिकायत की सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) ने जांच की तो आरोप सही पाए गए। इसके बाद सीडीओ ने तथ्यों को छुपाने के आरोप में इनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश सीडीपीओ को दिया। साथ ही नियुक्ति निरस्त कर दी।
इसके अलावा नगरा ब्लॉक के ढेकवारी की ज्ञानती देवी ने अपनी आयु छुपाने के लिए हाईस्कूल का फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। शिकायत के बाद हुई जांच में आरोप सही पाए जाने पर ज्ञानती देवी की नियुक्ति निरस्त कर दी गई है। इनके विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश सीडीपीओ को दिया गया हैं।
इसके पूर्व मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति पाने वाली तीन महिलाओं की नियुक्ति निरस्त कर दी थी। आठ मई को नगरा नगर पंचायत के जहांगीरपुरा वार्ड नं. तीन निवासी जयश्री ने फर्जी आय प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति पाई थी। इसके अलावा बीते दो मई को बेलहरी ब्लॉक के अंगनबाड़ी केंद्र बजरहा एवं रेपुरा में फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नियुक्ति पाने वाली गुड़िया पत्नी मनीष कुमार(रेपुरा) एवं अमृता दुबे पत्नी आलोक दुबे (बजरहा) की नियुक्ति भी सीडीओ ने निरस्त करते हुए संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया था। साथ ही सीडीओ के निर्देश पर एसडीएम सदर ने संबंधित लेखपाल को निलंबित कर दिया था।
मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।