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इश्क की एक मुकम्मल कहानी हूं...

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ददरी मेला के भारतेंदु मंच पर आयोजित कवि सम्मेलन का फीता काटकर शुभारंभ करते भाजपा के प्रदेश उपाध्? - फोटो : BALLIA
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बलिया। ददरी मेला के भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कला मंच पर रविवार की रात कवियों की महफिल सजी। उनकी रचनाओं पर देर रात तक वाहवाही गूंजती रही। हालांकि कार्यक्रम देर से शुरू होने से काफी संख्या में स्रोता वापस लौट गई। स्रोताओं की संख्या कम देख कवियों में नाराजगी दिखाई दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता भूषण त्यागी ने और संचालन शशिकांत यादव ने किया।
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भारतेंदु मंच पर कविसम्मेलन का आयोजन रात आठ बजे किया गया था, लेकिन इसकी शुरुआत रात साढ़े 10 बजे के बाद हुई। इससे श्रोता वापस हो लिए। कार्यक्रम शुरू होने पर श्रोताओं की कम संख्या देख कवि भी नाराज दिखे। कवि सम्मेलन की शुरुआत सरिता शर्मा ने सरस्वती वंदना सुर संधान तुम ही गीत विधान तुम्ही..., सारी दुनिया से दूर हो जाऊं तेरे आंखों का नूर हो जाऊं, तेरी राधा बनू ना बनू तेरी मीरा जरूर बन जाऊं... सुना कर स्रोताओं का ध्यान आकृष्ट किया। कवि विशाल बौखल ने सुनाया कि परिचय प्रथम कराया गुरुजी, की हिंद वाले शेर पाक जाकर दहाड़ देंगे, गीदड़ वहां के सारे डर के मर जाएंगे..., अभय सिंह निर्भिक ने अपने काव्य पाठ अपने पूज्य तिरंगे का अपमान नहीं होने देंगे..., भारत में तो भारत के कानूनों को अपनाना होगा... सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। हेमंत पांडेय ने सुनाया कि एक फूल तुम्हें देने के लिए सस्ते में ले लिया...। दिव्या दुबे ने सुनाया की इश्क की एक मुकम्मल कहानी हूं मैं जिसमें राजा है तू और रानी हूं मैं...। पंकज प्रखर ने देशभक्ति काव्य पाठ सुना कर वाहवाही लूटी कि हिंदुस्तानी शेर हूं मुझे दुश्मन से टकराने दो...। मुमताज नसीम ने सुनाया कि अब ऐसा क्या है जिसको छुपा रही हूं मैं..., पागलपन में क्या बतलाऊं सजना क्या क्या भूल गई, तुझसे मिलकर लौट रही थी घर का रास्ता भूल गई...पर खऊब तालियां बटोरी। गजेंद्र प्रियांशु ने सुनाया कि लक्ष्य हम पे सधे, सधे रह गए, हाथ पहले से बंधे थे बंधे रह गए, राह छोड़ो मेरी या मिलो राह में, बाह में लो मुझे या मुझे बाह में, इतने निर्मोही कैसे सजन हो गए...। अनुराग ओझा ने सुनाया कि जंजीर गुलामों के लिए बनाता है ,वह सख्स दवा देकर मर्ज बनाता है...। नंदनी श्रीवास्त की प्रस्तुति पल में तुमको तुमसे छीनू मैं जागूं हर नींद, हर इच्छा की एक परीक्षा जिसका मूल्यांकन होता है..से मन मोह लिया। डॉ विष्णु सक्सेना ने अपनी मखमली गीतों से खूब वाहवाही लूटी। दिल बिमार सही हो वह दवाएं दे दे..., प्यास बुझ जाए तो शबनम खरीद सकता हूं,जख्म मिल जाए तो मरहम खरीद सकता हूं...। अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाई। कवि सम्मेलन का उद्घाटन रात में ढाई बजे दयाशंकर सिंह, चेयरमैन अजय कुमार समाजसेवी, दिनेश विश्वकर्मा, सजेय पांडेय, पीयूष चौबे ने किया।
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