पुलिस की शिथिलता से नाराज ग्रामीणों और कारोबारियों ने दूकानें बंदकर नारे भी लगाए। एसडीएम ने कार्रवाई का आश्वासन देकर चार घंटे बाद जाम समाप्त कराया।
धरहरा के अवध किशोर गुप्ता कोटे की दूकान चलाते हैं। गुरुवार को उनके यहां केरोसिन का वितरण हो रहा था। इस दौरान अधिक तेल न देने पर गुस्साए मनबढ़ों ने उनके घर में घुसकर लाठी-डंडे से परिवार पर हमला कर दिया था। इसमें कोटेदार सहित नौ लोग घायल हो गए थे। इनमें रामदयाल (20) को गंभीर हाल में वाराणसी रेफर किया गया था। शनिवार की सुबह पिता अवध किशोर ने ग्रामीणों को रामदयाल की मौत की सूचना दे दी। इसके बाद सैकड़ों ग्रामीण और व्यापारी सड़क पर उतर गए। उन्होंने पुलिस के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए बलिया-सिकंदरपुर मार्ग जाम कर दिया। व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमीरचंद्र गुप्ता और जीतन चौहान के नेतृत्व में हनुमागंज और धरहरा की दूकानें बंद कर काफी संख्या में व्यापारी नेता भी धरहरा चट्टी पहुंच गए। पुलिस और पीएसी के समझाने का भी प्रदर्शनकारियों पर कोई असर नहीं हुआ। करीब चार घंटे बाद एसडीएम सदर रामानुज सिंह, सिकंदरपुर के एसडीएम घनश्याम त्रिपाठी, सीओ सिटी केसी सिंह पहुंचे। उन्होंने उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन देकर जाम समाप्त कराया।
इस मौके पर लोगों ने एसडीएम को तीन सूत्री मांग पत्र सौंपा। इसमें आरोपियों की 24 घंटे के अंदर गिरफ्तारी, पुलिस की कार्यशैली की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई के अलावा परिवारजनों को मुआवजे की मांग शामिल हैं। पत्रक में चेताया गया है कि यदि 24 घंटे के अंदर मांगें पूरी नहीं हुईं तो ग्रामीण फिर सड़क पर उतरेंगे। उधर, बेटे की मौत की खबर मिलते ही रामदयाल की मां सुमन और बहन वृंदा देवी अचेत हो गईं। उन्हें हनुमानगंज में निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया गया है। घरवाले का कहना था कि घटना के वक्त पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन एक घंटे बाद वह मौके पर पहुंची। प्रदर्शनकारियों में जीरा बस्ती के ग्राम प्रधान जितेंद्र सिंह चौहान, भाजपा नेता नागेंद्र पांडेय, अजय यादव, छात्रनेता मनोज यादव, गुड्डू, हरेराम गुप्ता, टुनजी तिवारी, मदन, बासुदेव, हरेराम गुप्ता, उमेश, गोपालजी, सूरज चौहान, सुखपुरा ग्राम प्रधान उतीमचंद्र गुप्त समेत हजारों ग्रामीण शामिल थे।