रामगढ़। गंगा के रौद्ररूप को देखते हुए तटवर्ती लोगों में मायूसी छाने लगी है। इलाके में नदी ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया है। लगभग 10 दिनों से गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ- साथ कटान भी शुरू हो गया है। जिसकी जद में आने से किसानों की 10 एकड़ भूमि गंगा की गोद में समाहित हो चुकी है। कटान अनवरत जारी है। केन्द्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा नदी का जलस्तर सुबह 8 बजे 51.91 मी. दर्ज किया गया। जबकि नदी 1/2 से.मी. की रफ्तार से बढ़ाव पर है।
गंगा तटवासी कटान पीड़ितों का कहना है कि गंगा नदी के जलस्तर वृद्धि से भयंकर कटान होना तय है। लेकिन सरकार द्वारा निर्धारित मानक के अनुरूप कार्य नहीं किया जा रहा है जिसका नतीजा हम लोग भुगत रहे हैं। नदी का जलस्तर बढ़ाव पर है जिसको देखते हुए बाढ़ विभाग के अधिकारियों को शनिवार को ड्रेजिंग कार्य का निरीक्षण के दौरान बैरिया विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह ने जल्द से जल कटान निरोधक में तेजी लाने की निर्देश दिया था। लेकिन विभाग को इसकी कोई परवाह नहीं है। बाढ़ विभाग के अधिकारी बारिश की बात कहकर टालमटोल कर रहे हैं।
पानी के बढ़ते दबाव से गंगा नदी ने आंखें तरेरनी प्रारंभ कर दी है, उधर, लगातार हो रही बारिश भी नदी में पानी का बढ़ाव जारी है। इससे तटवर्ती इलाकों में कटान का खौफ एकबार फिर मंडराने लगा है। क्षेत्र के चौबे छपरा, केहरपुर, सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर उदई छपरा आदि तटवर्ती गांवों की जमीन को हमेशा की तरह इस बार भी धीरे-धीरे गंगा नदी काटकर अपने आगोश में ले रही है, जिससे इलाके के लोग सहमे हुए हैं। नदी का रौद्र रूप देखकर किसानों के माथे की चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं। विवशता तो ये है कि उन्हें अपनी जमीन को बचाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा। कटान रोकने के लिए कहीं-कहीं तो हरे पेडों की बलि भी दी जा रही है लेकिन यह भी कारगर साबित नहीं हो रहा है। नदी के बैकरोलिंग की वजह से चौबे छपरा से लेकर केहरपुर के बीच नदी की धारा से उपजाऊ जमीन छपाक-छपाक करके गंगा नदी में समा रही है।
गोपालनगर के 100 परिवारों पर कटान का मंडरा रहा खतरा
बैरिया। घाघरा नदी उत्तरी दियरांचल में दस्तक देने को आतुर है। वहीं, पानी की तेज धारा से गोपालनगर ग्राम पंचायत के करीब 100 परिवार के आशियाने को घाघरा नदी कभी भी निगल सकती है। आलम यह है कि कटान से बस्ती की दूरी महज पांच मीटर रह गई है।
कटान की मुहाने पर भोला यादव, हरिकिशुन यादव, सुरेन्द्र यादव, मुनिलाल यादव के रिहायशी मकान हैं। जिससे इस टोला के बाशिंदे दहशत में है। जबकि अगले साल नदी के कटान से करीब दर्जन भर परिवार अपना आशियाना उजाड़ कर रामबालक बाबा आश्रम के निकट टीएस बन्धे पर शरण लिए हुए हैं। गोपालनगर टांड़ी के वाशिंदों पर घाघरा नदी के कटान का खतरा मंडरा रहा है। कटान के बिल्कुल मुहाने पर रहने वाले रामजखीरा यादव, भोला शंकर, राजकुमार, हीरा यादव, जितेन्द्र यादव, वीरबल यादव, हरेन्द्र यादव, मनोहर यादव आदि आदि लोग एक वर्ष पूर्व ही अपना आशियाना उजाड़ कर रामबालक बाबा आश्रम के निकट शरण लिए हुए हैं। वही, अभी भी करीब 100 परिवार पर कटान का संकट मंडरा रहा है। गांव के प्रधान प्रदीप यादव ने कहा कि सूचना के बाद भी शासन प्रशासन सुधि नहीं ले रही है।
सरयू का कटान तेज, तीन दिनों में सात एकड़ कृषि भूमि चढ़ गई नदी की भेंट
जयप्रकाश नगर। तीन दिनों से चल रही पुरवइया हवा व हो रही बारिश से सरयू नदी ने अपना तांडव करना शुरू कर दिया है और दो किलोमीटर की दूरी में कटान करते हुए करीब आधा दर्जन किसानों के करीब सात एकड़ कृषि योग्य भूमि को अपने आगोश में ले लिया है। अभी भी यहां रुक-रुक कर कटान जारी है। ग्रामीण सरयू नदी के इस स्थिति को देख अंदाज लगा रहे हैं कि अभी तो नदी के तांडव करने की शुरुआत है यदि यही स्थिति रही तो कहीं 1975 के कटान की कहानी की पुनरावृत्ति न कर दें।
विकास खण्ड मुरली छपरा क्षेत्र के चांद दियर गांव के पूरब व दक्षिण दिशा की तरफ सरयू नदी बहती हैं। गांव के ग्राम प्रधान वीरेन्द्र यादव, शिवकुमार यादव, धर्मेंद्र यादव, गणेश यादव आदि ने बताया कि नदी हमारे पंचायत क्षेत्र में बीते शुक्रवार से तेजी से कटान कर रही है। अभी तक करीब सात एकड़ कृषि योग्य भूमि को अपने आगोश में ले चुकी है। बताया कि हो रहे कटान क्षेत्र से करीब दो तीन एकड़ बाद ही किसानों द्वारा बोए गए मक्के की करीब फसल लगी हुई है जो करीब पांच सौ एकड़ है। इसके चलते हो रहे कटान को देख किसान भयभीत हो चुके हैं कि सरयू कहीं इसी गति से कटान करती रही तो हमारी फसल को नष्ट करते हुए हमारे गांव सहित बीएसटी बांध की तरफ पहुंच सकती है।
गांव के बुजुर्गों के अनुसार सरयू ने 1975 में इसी तरह अपना तांडव दिखाई थी। उस समय गांव के आधे बाशिंदों की मकान को अपने आगोश में ले लिया था। तो भी सरकार द्वारा चांद दियर के लिए कोई मदद नहीं की गई थी। पुन: सरयू नदी ने हम बाशिंदों को बेबश समझ हमारे गांव को छोड़कर वापस हो गई थी और करीब ढाई किमी दूर चली गई। हमलोगों का जीवन सामान्य चलने लगा। लेकिन फिर वर्ष 2011 में सरयू ने अपना रुख गांव की तरफ करते हुए इस पंचायत में स्थित क्षेत्र के कई गांवो के दर्जनों किसानों की करीब तीन सौ एकड़ कृषि योग्य भूमि को अब तक अपने आगोश में ले चुकी है और पिछले तीन दिनों से पुरवईया हवा के बारिश के बीच कटान शुरु हो गया है। ग्रामीणों की माने तो वर्ष 2010-11 से चांद दियर पंचायत में कटान जारी हुआ है तब से आज तक बचाव के नाम पर इस पंचायत के लिए शासन प्रशासन द्वारा कुछ भी नहीं किया गया।
सरय के तटवर्ती गांवों के लिए बारिश बनी काल, कटान की भेंट चढ़ रही उपजाऊ भूमि
मनियर। लगातार हो रही बारिश से सरयू नदी के जलस्तर में वृद्धि होने लगी है। जिससे तटवर्ती इलाकों में कटान का खौफ एकबार फिर मंडराने लगा है। क्षेत्र के रिगवन छावनी, ककरघट्टा खास, नवका गांव आदि तटवर्ती गांव की उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे कटान की भेंट चढ़ने लगी है। नदी का रौद्र रूप देखकर किसानों के माथे की चिंता की लकीरें खींच गई है।
बताते चलें कि पूर्व जिला अधिकारी भवानी सिंह खंगारौत के प्रयास से एलासगढ़ से लेकर ककरघट्टा तक कटानरोधी कार्य कराया गया था। इससे तटवर्ती इलाके के बस्तियों के बचाव की काफी उम्मीद जगी थी, लेकिन पुन: नदी से कटान होने से क्षेत्र के लोग भयभीत हैं। बीते 19 जून को जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने टीएस बंधे की तिलापुर से मनियर तक बारिकी से निरीक्षण किया था तथा बाढ़ विभाग के अभियंताओं को निर्देश दिया था कि बैकरोलिंग के चलते कटान न होने पाए। कटानरोधी कार्यों व बाढ़ राहत व्यवस्था समय से किए जाने का उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए नाराजगी भी जाहिर की थी कि बचाव कार्य कब किया जाएगा जब बाढ़ आ जाएगा तब। कटानरोधी कार्यों व बाढ़ राहत व्यवस्था न किए जाने पर बाढ़ विभाग के एक्सईएन संजय मिश्रा पर भी नाराजगी जाहिर की थी। लेकिन इसके बावजूद कटानरोधी काम शुरु नहीं हो सका। आलम यह है कि जयप्रकाश पाठक, त्रिलोकी पांडेय, श्रीराम पांडेय, लडू पाठक, शमशेर पांडेय, सत्यनारायण, मोहन पांडेय, पति राम यादव, सतदेव आदि किसानों की जमीन नदी में विलीन हो रही है। इनकी मानें तो तीन दिन की लगातार बारिश में लगभग 50 बीघा जमीन नदी में समाहित हो चुकी है।