बलिया में नकल बना रही निकम्मा: संदीप पांडेय
- छात्र, अभिभावक, शिक्षक व स्कूल प्रबंधक नहीं चाहता रुके नकल
संवाद न्यूज एजेंसी
बलिया। पहले जब सुुनता था कि बलिया में दूर-दूर से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं तो अच्छा लगता था। बाद में पता चला कि वे पढ़ने नहीं बल्कि नकल मारने आते हैं। नकल माफिया का एक ऐसा गिरोह बलिया व आसपास के जिलों में सक्रिय है, जो बच्चों को निकम्मा और बेरोजगार बना रहा है। इसमें शिक्षा विभाग और अभिभावक भी शामिल है। यह बात संदीप पांडेय ने कही।
उन्होंने कहा कि अभिभावक चाहते हैं कि उनके बच्चे भले ही खेती करें लेकिन डिग्री मिल जाए। स्कूल का प्रबंधक चाहता है कि उसके मोटी रकम मिले। शिक्षक चाहता हैं कि पढ़ाना न पड़े। यह सब शिक्षा के निजीकरण के चलते है। इस व्यवस्था को बदलने के लिए अभिभावक, छात्र, शिक्षक व प्रबंधक की सोच को बदलनी होगी। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश में दोबारा सरकार बनना दुर्भाग्यपूर्ण है। जो डीएम व एसपी निर्दोष को दोषी बना सकते हैं और कसूरवारों पाकसाफ करार दे सकते हैं वह ईवीएम में भी हेराफेरी कर अपनी सरकार भी बना सकता है। बलिया में बढ़ती बेरोजगारी का मूल कारण नकल है। नकल से पास होने वाली युवा पीढ़ी के पास अक्ल की कमी है। एक हफ्ते के अंदर अगर जेल गए पत्रकारों को न्याय नहीं मिला तो बलिया से लखनऊ तक पदयात्रा एवं अनशन की शुरुआत की जाएगी।