हल्दी। सोनवानी गांव के उमाशंकर सिंह के बड़े बेटे दिलीप कुमार सिंह ने दूसरी जाति की कन्या से विवाह कर लिया तो परिवार वालों ने घर से बाहर कर दिया। वह घर आना चाहता था लेकिन परिवार के लोग आने नहीं देते थे। घर वालों की यही उपेक्षा उसके लिए वरदान साबित हुआ। घर में रहता तो हत्यारों से उसे भी मार दिया होता।
दिलीप सिंह 2010 में बाहर चला गया और गैर बिरादरी में शादी कर ली थी। उसके बाद घर वालों ने उससे नाता तोड़ लिया। वह गांव के संभ्रातों के यहां फोन करके गांव आने की इच्छा प्रकट करता था। गांव वालों ने कई बार उमाशंकर व संदीप से उसकी बात बताई लेकिन दोनों दिलीप को घर आने नही देना चाहते थे। इसी बीच दिलीप सिंह की पत्नी गुजर गई। वह करीब 12 साल से गोरखपुर रहता है। दिलीप की मां का निधन भी नवंबर 2021 में हो गया। मगर वह घर नहीं आया। दिलीप 26 मई को गांव आया था। उसने घर में रहने की इच्छा जताई लेकिन उमाशंकर व संदीप ने उसकी एक नहीं सुनी। संदीप का कहना था कि सारी संपत्ति उसने अर्जित की है और दिलीप को एक इंच जमीन नहीं मिलेगी। विवाद के बाद दिलीप घर से 100 मीटर दूर सोनवानी -समरथपार मार्ग पर काफी देर तक बैठा रहा। गांव के लोगों ने बताया कि दाढ़ी व बाल बढ़ाकर वह साधुओं जैसा हो गया है। उसने कुछ लोगों से अपनी बात बताई लेकिन उसकी मदद करने की स्थिति में कोई नहीं था। ऐसे में दिलीप को निराशा लौटना पड़ा। गांव वालों का कहना है कि संयोग अच्छा था कि दिलीप घर पर नहीं रुका वर्ना हत्यारे उसकी भी जान ले लेते। घर का कोई वारिस नहीं बचता।
उमाशंकर सिंह के मझले पुत्र संदीप का जन्म 1987 में हुआ। पिता उमाशंकर ने खेती करके बच्चों को का लालन पालन किया। मगर संदीप कई नाजायज धंधों से काफी संपत्ति अर्जित कर ली थी। उसने तमाम लोगों से धोखाधड़ी की थी और शानो-शौकत की जिंदगी बसर करता था।