बलिया। लाक डाउन के चलते मार्च के महीने से सभी प्राइवेट विद्यालय बंद हैं। इससे एक ओर जहां बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई है तो दूसरी ओर इन स्कूलों में अध्यापन कार्य में जुटे शिक्षकों के सामने निवाले का भी संकट उत्पन्न हो गया है। हालांकि सरकार की पहल पर अधिकांश नीजि विद्यालयों ने आनलाइन पढ़ाई शुरू कर बच्चों का कोर्स पूरा कराने की तो पहल शुरू कर दी है, लेकिन मास्साब को सैलरी कैसे मिलेगी यह यक्ष प्रश्न बन गया है। हालांकि जिले में नागाजी स्कूल को छोड़कर सभी स्कूलों ने अपने कर्मचारियों की सैलरी दी है, लेकिन अप्रैल की सैलरी को लेकर स्कूल प्रशासन के लोग भी परेशान हैं।
बता दें कि जिले में पहले चरण में 25 मार्च और दूसरे चरण में 15 अप्रैल से लगे लॉकडाउन के बीच लोगों की दिनचर्या काफी बदल गई है। कोरोना के चलते कईयों का रोजगार भी छिन गया है। ऐसे में जो बेहद गरीब हैं उनका काम तो सरकारी और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से मिलने वाली मदद से चल जा रहा है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के सामने अजीबोगरीब हालात पैदा हो गये हैं। सभी पैरेंट्स इतने जागरूक भी नहीं कि वे ऑनलाइन फीस जमा कर सकें? स्कूल प्रबंधकों के सामने भी संकट की स्थिति है कि जब फीस नहीं मिली तो आखिर वे कहां से सैलरी दे पाएंगे, इसे लेकर सरकार की तरफ से भी कोई कदम नहीं उठाया गया है। स्कूल प्रबंधकों का ये भी कहना है कि ऐसे समय में सरकार को हमारी मदद के लिए आगे आना चाहिए, ताकि हम अपने कर्मचारियों की पूरी सैलरी दे पाएं।