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उसकी सिसकियों ने बेचैन कर दिया था...इसलिए नेवर अगेन निर्भया

Tue, 07 Mar 2017 10:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो /बलिया
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दामिनी, निर्भया, बिटिया... उस समय उसे कई नामों से पुकारा गया। मीडिया के माध्यम से समाज ने कुछ जाहिलों की बर्बरता की शिकार निर्भया को तिल-तिल कर मरते देखा था।13 दिनों तक अस्पताल में पड़ी निर्भया की सिसकियों को पूरे देश ने सुना। उस पीड़ा को महसूस भी किया। उसके निधन पर पहली प्रतिक्रिया थी ...स्तब्धता और मौन। उस मासूम की आत्मा की शांति के लिए देश में एक अनकहा मौन रखा गया। लेकिन उसके  साथ हुए अपराध का उपसंहार मौन कभी नहीं हो सकता था। यह कहना है पायल कश्यप का। जो इन दिनों निर्भया कांड पर फिल्म बना रही हैं। नारी सशक्तिकरण की प्रतीक बलिया की इस बेटी पर बन रही फिल्म का नाम है ‘नेवर अगेन निर्भया’। वास्तव में निर्भया वूमन इंपावरमेन्ट की प्रतीक है।
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नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए मुंबई में स्त्री शक्ति सम्मान 2016 तथा लखनऊ में राज्यपाल पश्चिम बंगाल केशरी नाथ त्रिपाठी के हाथों मार्वलस पर्सनालिटी ऑफ इंडिया 2016 अवार्ड से भी सम्मानित हो चुकी पायल ने मंगलवार को अमर उजाला को फोन पर बताया कि बलिया की बिटिया से नई दिल्ली में हुई दरिंदगी की घटना ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था। वह स्तब्ध हो गईं थी। निर्भया को निर्देशित करने के पीछे के इरादे पर बताया कि बहुतों की तरह उस समय निर्भया की सिसकियां मुझे सोने नहीं देती थी। मैंने तभी सोच लिया था ऐसी फिल्म निर्देशित करूंगी जिसे देखकर कोई भी दरिंदा इस तरह की घिनौनी हरकत करने से पहले सौ बार सोचे। निर्भया कांड पर जब पूरे देश गुस्से में था तब संवेदनशील रचनाधर्मियों की एक जमात चुपचाप अपने काम में लगी थी। वूमन इंपावरमेन्ट पर पायल कहती हैं कि देश की 50 प्रतिशत शक्ति महिलाओं की है पर उन्हें उनका सम्मान नहीं मिलता है। हमारे पुराणों में कहा गया है कि यत्र नार्यस्तु पूज्यनते, रमन्ते तत्र देवता। लेकिन इस शक्ति को लोग आज भूल गए हैं। नारी को अबला मत समझो वक्त आने पर यह काली या दुर्गा बनकर पापियों का संहार भी कर सकती है।
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