रामगढ़। कटान रोधी कार्य में उदासीनता के चलते गंगा के तटवर्ती गांवों को लोग कटान और बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं। कटान रोधी कार्य में मानकों की अनदेखी की स्थिति यह है कि गंगापुर सोनारटोला में ठोकर लगा है लेकिन गंगा नदी का जलस्तर बढ़ते ही ठोकर दो फुट से अधिक नीचे खिसक गया है। लोहे की जाली में भरे बोल्डर के बीच लगभग एक फुट की दरार बन गई है।
बोल्डर खिसकने से गंगा तटवासियों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग के उत्तर दिशा में बने लोगों में भी अफरातफरी मची है लोगों के रातों को नींद उड़ने लगी है। पिछले दिनों राज्यमंत्री आनंद स्वरुप शुक्ला ने कार्यों का निरीक्षण किया। राज्यमंत्री को आसपास के लोगों ने इस बात से अवगत जरूर कराया था कि कटानस्थल पर कार्य 15 दिनों से बंद है व पिछले कार्यों में लापरवाही की गई है लेकिन यह सब कुछ केवल कोरम तक ही रह गया।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित उत्तराखंड में हुई मूसलाधार बारिश होने के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ रहा हैं।
मानसून आने से कुछ दिन पूर्व ही कटानरोधी कार्य की शुरू हुआ जो अब भी अधर में लटका हुआ है। बाढ़ विभाग के अधिकारियों की मानें तो 70 प्रतिशत के लगभग कार्य को अंजाम तक पहुंचा दिया गया है जबकि सही धरातल पर 50 फीसदी भी कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। पिछले सात-आठ साल से बाढ़ का पिक टाइम अगस्त से लेकर सितंबर तक रहा है। वर्ष 2013 में जहां गंगा का उफान दो अगस्त से लेकर पांच सितंबर तक रहा था वहीं पिछले साल गंगा की लहरें 20 सितंबर तक दुबेछपरा, उदई छपरा, गोपालपुर, केहरपुर, चौबेछपरा आदि गांवों में कहर बरपाती रही।
हाईवे पर रखे बोल्डर से हादसे का खतरा
रामगढ़। बतौर प्रमाण एनएच-31 के किनारे रखे बड़े-बड़े बोल्डर हैं। नेशनल हाइवे-31 के पचरुखिया ढाले से लेकर रामगढ़ तक का बोल्डरों से सड़क सिमट गई है जिससे दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ रोधी कार्य अगर समय से पूरा कर लिया गया होता तो जहां तहां बोल्डर नहीं पड़े रहते। उन्होंने बोल्डर हटाने की मांग की है।