गंगा के कटान में विलीन चार विद्यालयों के छात्र पिछले कई वर्षों से एक ही विद्यालय में पढ़ रहे हैं। विडंबना यह है कि एक विद्यालय के पांच कमरों में पांच विद्यालयों की कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में लगभग 400 बच्चे चार कमरों में कैसे अध्ययन कर रहे हैं, यह आश्चर्य का विषय है। बार-बार के स्थानीय लोगों के आग्रह के बावजूद यह विद्यालय भवन बेसिक शिक्षा विभाग अन्यत्र नहीं बना पा रहा है। इससे कटान पीड़ितों को भारी असुविधा हो रही है।
प्राथमिक विद्यालय शाहपुर गंगौली, प्राथमिक विद्यालय उदय छपरा, प्राथमिक विद्यालय श्रीनगर और उच्च प्राथमिक विद्यालय सुघर छपरा के सभी छात्र-छात्राएं प्राथमिक विद्यालय सुघर छपरा के भवन में पढ़ रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय शाहपुर गंगौली 2012 में गंगा में विलीन हो गया। प्राथमिक विद्यालय उदय छपरा 2015 में गंगा में विलीन हो गया था। उच्च प्राथमिक विद्यालय सुघर छपरा 2023 में गंगा में विलीन हो गया था। प्राथमिक विद्यालय श्रीनगर 2019 में गंगा में विलीन हो गया था। तब से इन सभी विद्यालयों को बेसिक शिक्षा विभाग ने प्राथमिक विद्यालय सुघर छपरा में संलग्न कर दिया है। पांच कमरों के इस विद्यालय में सभी विद्यालय चल रहे हैं। एक कमरे में एमडीएम बनता है। ऐसे में बच्चे कैसे पढ़ते हैं, इसका कोई भी सहज अंदाजा लगा सकता है। जिला पंचायत सदस्य गीता सिंह ने पिछले वर्ष सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के कवरिंग लेटर के साथ विद्यालय भवनों को बनाने का प्रस्ताव बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा था। अभी तक उसकी मंजूरी नहीं मिल पाई है। भवन निर्माण के अवर अभियंता सत्येंद्र राय ने बताया कि प्रस्ताव को बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशालय में भेजा गया है। जल्द कारवाई होने की उम्मीद है। बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के सहायक निदेशक और प्रदेश के भवन प्रभारी श्याम किशोर तिवारी ने बताया कि अगले वित्तीय वर्ष में इन विद्यालयों के लिए धन आवंटित किया जाएगा। फिलहाल इस वर्ष संभव नहीं है।