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पांच और मकान गिरे, ग्रामीणों की नींद उड़ी

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सरयू के तेवर भले ही नरम पड़ गए हैं, लेकिन गोपालनगर टाड़ी गांव में नदी का कहर अब भी जारी है। शुक्रवार की रात भी पांच मकान नदी की धारा में समा गए। अब तक कुल 74 लोगों के आशियाने नदी में समाहित हो चुके हैं। कंगाली के कगार पर पहुंचे किसान अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर हैं। अभी तक किसानों को सरकारी सहायता नहीं मिल सकी है।
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शुक्रवार रात को गांव के वीरेंद्र यादव, अतवारू यादव, मृत्युंजय यादव, हीरा यादव और विनोद यादव के रिहायशी मकान सरयू नदी के धारा में समा गए। तहसील प्रशासन के अनुसार, कुल 62 लोगों का ही रिहायशी मकान सरयू नदी में समाहित हुआ है। इसकी संख्या 74 है। ऐसे में 12 कटान पीड़ित अभी भी जांच रिपोर्ट से वंचित हैं। क्षेत्रीय लेखपाल राजू यादव ने बताया कि शुक्रवार की रात पांच लोगों का टीनशेडनुमा मकान सरयू नदी में समा गया। इसके अलावा, 50 टीनशेड नुमा मकान, एक झोपड़ीनुमा मकान और छह लोगों का पक्का मकान सरयू नदी में समाहित हुए हैं। लेखपाल के अनुसार, छत वाले पक्के मकान वाले कटान पीड़ितों को 95100 रुपये मुआवजा मिलेगा। वहीं, पक्की दीवार व टीनशेड नुमा मकानों के लिए प्रति कटान पीड़ित सिर्फ 5200 रुपये संतोष करना पड़ेगा। रिहायशी झोपड़ी वाले कटान पीड़ित को प्रति कटान पीड़ित 4100 रुपये ही मिलेगा। लेखपाल ने बताया कि अगले सप्ताह तक कटान पीड़ितों के खाते में पैसा चला जाएगा। कटान पीड़ित भरत यादव, सावित्री देवी, राजेंद्र यादव, सुरेंद्र यादव आदि ने कहा कि ऊंट के मुंह में जीरे के समान हमें मुआवजा देने की बात की जा रही है। हमारे खेत, खलिहान, घर, मकान सब कुछ सरयू नदी में विलीन हो गया। हम कंगाली के कगार पर आ गए हैं।
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