इधर आग से गांव में हड़कंप की स्थिति रही। बचाओ-बचाओ के शोर के बीच कोई सामान बचाने की जुगत में था तो कोई आग बुझाने की कोशिश में जुटा था। कुछ लोग बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे थे तो कई मवेशियों को। ग्रामीणों के अथक प्रयास से काफी देर बाद आग पर काबू पाया जा सका। इसकी वजह से आधी रात तक दहशत का माहौल बना रहा। झुलसी दोनों महिलाओं का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज चल रहा है।
खुले आसमान के नीचे आए अग्निपीड़ित
आगलगी की इस घटना में मार्कंडेय की दो झोपड़ियां, 25 हजार नकद, सोने व चांदी के कुछ आभूषण सहित 11 क्विंटल गेहूं व पांच क्विंटल चावल जल गया। वहीं, उसके छोड़े भाई गोविंद की एक झोपड़ी और उसमें रखा दहेज का सारा सामान फ्रीज, कूलर, बक्सा, 15 क्विंटल राशन व गहना जल गया।
वहीं, रामभजन पुत्र जगदीश बिंद की दो झोपड़ी, दिनेश बिंद पुत्र स्व. रामनरेश की झोपड़ी, बाइक, साइकिल व भूसा, शिवजी बिंद पुत्र विकल बिंद की एक झोपड़ी व 10 क्विंटल गेहूं, किरण पत्नी रामभजन बिंद की दो झोपड़ी, 40 हजार रुपये, आभूषण व 12 क्विंटल अनाज, विकल की एक झोपड़ी व राजनाथ बिंद की एक झोपड़ी तथा आठ क्विंटल अनाज समेत उसमें रखा घर गृहस्थी का सारा सामान, चार कुक्कुट, दो खरगोश समेत अन्य जरूरी कागजात जल कर राख हो गए। घटना के बाद सभी परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। वहीं, ग्राम प्रधान तारीक अजीज ने पीड़ित परिवारों को तत्काल राशन व अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।