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धान खरीद न होने पर चक्का जाम: बलिया में डिप्टी आरएमओ ने किसानों से की वार्ता, कल से होगी खरीद

Fri, 31 Dec 2021 06:28 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, बलिया

सार

डिप्टी आरएमओ ने किसानों संग थाने में बातचीत कर शनिवार से धान खरीद का आश्वासन दिया, जिसके बाद किसान शांत हुए और जाम समाप्त किया।
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धान खरीद - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बलिया जिले के मार्केटिंग गोदाम सुखपुरा में धान क्रय केंद्र पर धान की खरीद नहीं किए जाने से आक्रोशित किसानों ने चौराहे पर चक्का जाम कर बलिया-सिकंदरपुर मार्ग को एक घंटे तक जाम कर दिया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई। डिप्टी आरएमओ ने किसानों संग थाने में वार्ता की। खरीद में आ रही बाधा को दूर करने और खरीद शुरू कराने के आश्वासन पर किसान माने और जाम समाप्त किया। 

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किसानों का आरोप है कि क्रय केंद्र पर दर्जनों किसान अपने अपने धान लेकर कई दिनों से पड़े हैं, लेकिन उनका धान नहीं खरीदा जा रहा है। धान खरीद में शासन द्वारा लगातार हो रही तब्दीली से भी किसान व कर्मचारी परेशान हैं। चक्का जाम के समाप्ति के घंटे भर बाद डिप्टी आरएमओ अविनाश सांगरवाल, नायब तहसीलदार अजय सिंह ने थाना परिसर में किसानों से वार्ता की।

किसानों की समस्याओं से अवगत हुए। शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया। सहयोग की अपील की। आनंद कुमार सिंह, मदन पटेल, बिंदा देवी, मंगला सिंह, साधू सिंह, दुर्गेश कुमार सिंह, लोकेश सिंह, राहुल सिंह, दीपक सिंह आदि शामिल रहे।

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केंद्रों पर हो रही किसानों को परेशानी
धान खरीद के लिए बनाए गए क्रय केंद्रों की स्थिति दयनीय है। किसान कई दिनों से अपनी ट्राली पर धान लादकर खड़े हैं, लेकिन खरीद नहीं होने से परेशानी हो रही है। इस बीच खराब हो रहे मौसम ने उन्की नींद उड़ा रखी है। शासन की ओर से टोकन फ्री व्यवस्था को बंद कर टोकन सिस्टम जारी किया। किसानों ने टोकन निकाला तो कई किसानों को टोकन रद कर फिर से पहले की तरह फ्री व्यस्था कर दी गई। इसके बाद फिर टोकन चालू कर दिया गया।
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इन सबके बीच केंद्र पर अधिकारियों के साथ ही किसानों की परेशानी बढ़ी हुई है।किसानों का आरोप है कि वो असहाय की स्थिति में हैं। हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। आखिर धान कैसे बेचा जाए। उनका लाभ बिचौलियों उठा रहे हैं। बारिश रुक-रुक कर हो रही है। जिसके कारण किसान रात में अपनी धान की निगरानी करने के लिए खुले आसमान के नीचे सोते हैं। उच्च अधिकारियों से बात होने पर आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल रहा है। इससे किसानों में भारी आक्रोश है।
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