सपा नेता बंशीधर यादव ने कहा कि कोरोना काल में लाया गया नया कृषि कानून किसानों का डेथ वारंट था। 900 से अधिक किसानों की शहादत देने के बाद किसानों की जीत हुई है। किसान नेता केडी सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने जो कृषि कानून वापस लिया है वह स्वागत योग्य कदम है। किसान अनिल राय ने कहा कि कृषि कानून किसानों के खिलाफ था केन्द्र सरकार किसानों को समझने में चूक कर गई और किसानों ने अहिंसा के रास्ते पर चल कर जीत हासिल कर लिया, शहीद किसानों की शहादत को सलाम करते हैं।
पीएम द्वारा तीन कृषि कानूनों वापस लिए जाने के फैसले पर क्षेत्र के भीटा भुआरी गांव के निवासी किसान नेता विनोद मानव ने किसानों, मजदूरों, गरीबों व मेहनतकश लोगों की जीत करार दिया। कहा कि सरकार को इस कानून को और पहले वापस ले लेना चाहिए था, आंदोलन में सैकडों किसानों की शहादत नहीं होती। आगामी समय में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा के चुनाव के मद्देनजर सरकार ने किसान आंदोलन के दबाव में आकर कानून को वापस लिया है।
प्रगतिशील भोजपुरी समाज के केंद्रीय संगठन सचिव रविंद्र यादव नेकहा कि प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान से लगभग एक साल से चल रहा किसान आंदोलन अपने विजय के पड़ाव पर पहुंच गया। किसानों को अपने हितों की रक्षा, कृषि उपज का सही मूल्य और समृद्धि आदि के लिए और अधिक जागरूक और संगठित होना होगा। ॉॉ
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2019 की तुलना में वर्ष 2020 में किसानों के आत्महत्या दर में 18 फीसदी की वृद्धि हुई और 10667 किसानों ने आत्महत्या की। किसान गणेश यादव ने कहा कि हम किसान महंगे दामों में खाद-बीज खरीद करके खेत बोते हैं जब फसल काटने का समय होता है तो सरकारी क्रय केंद्रों पर हमें चक्कर लगाना पड़ता है। किसान राजकुमार प्रसाद ने बताया कि गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद तहसील स्तर पर सत्यापन होता है लेकिन हालात यह है कि सत्यापन के बावजूद भी गेहूं खरीद नहीं हो पाता है।