महर्षि भृगु के शिष्य दर्दर मुनि की तपोस्थली में लगने वाला ददरी मेला बच्चों के लिए मनोरंजन, गृहिणी के लिए श्रृंगार और आम आदमी के लिए सस्ते सामानों का साधन तो है, साथ ही इस मेले में लोकगीत, मुशायरा, कव्वाली, कवि सम्मेलन का बेहतरीन रूप देखने को मिलेगा।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन से शुरू होकर लगभग एक माह तक चलने वाले इस मेले में चेतक प्रतियोगिता का आयोजन 29 नवंबर को किया गया है। यहां दो दिसंबर को विराट कुश्ती-दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। छह दिसंबर को आयोजित कव्वाली में कलाकार अपनी दिलकश अदाओं के साथ मर्मस्पर्शी कव्वाली पेश करेंगे।
इसके बाद 10 दिसंबर की रात मुशायरा कार्यक्रम होगा। 13 दिसंबर को कवियों की कविताएं सामाजिक कुरीतियों पर कुठाराघात करेगी तो अगले ही एक दिन बाद 15 दिसंबर को लोकगीत कलाकारों के सुरों का जलवा बिखरेगा।
29 नवंबर को आयोजित चेतक प्रतियोगिता के लिए नंदीग्राम में फील्ड बनकर तैयार हो गया है। घुरसवार रोज अपने घोड़े को लेकर रिहर्सल कर रहे हैं।ं बिहार सहित एमपी के भी घुड़सवार प्रतियोगिता में भाग लेने के पहुंच चुके हैं।