बैरिया। रानीगंज बाजार स्थित निजी क्लीनिक में पिछले सप्ताह मधुबनी निवासी पिंकी देवी के जुड़वा बच्चों के प्रसव के बाद मौत के मामले में सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जांच के लिए चिकित्सकों की कमेटी तो गठित कर दी, लेकिन आदेश के तीन दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग का कोई भी चिकित्साधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे पीड़ित के मन में क्षोभ है। अवैध क्लिनिक के संचालन में स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं।
रानीगंज, बैरिया सहित आसपास के बाजारों और कस्बों में दर्जनों नर्सिंग होम अथवा निजी अस्पताल निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन कर खुलेआम संचालित हो रहे हैं। आए दिन कहीं न कहीं जच्चा-बच्चा की मौत को लेकर बवाल होता है। सब कुछ जानने के बावजूद कतिपय आशा और संगिनी ग्रामीण महिलाओं को प्रसव कराने के नाम पर अवैध नर्सिंग होम या निजी अस्पतालों में पहुंचा रही हैं। सूत्रों के अनुसार नार्मल डिलिवरी पर आशा अथवा संगिनी को एक हजार और सीजेरियन डिलिवरी पर 2500 रुपये फिक्स रकम दी जाती है। इसके एवज में नर्सिंग होम अथवा अस्पताल के संचालक मरीज का जमकर शोषण करते हैं। स्वास्थ्य विभाग सबकुछ जानने के बाद मौन साधे रहता है। पिंकी देवी प्रकरण में भी ऐसा ही नजर आ रहा है।
किन्ही कारणों हम लोग मौके पर नहीं जा पाए। आज किसी चिकित्सक को जांच के लिए मौके पर भेजेंगे या स्वयं जाएंगे। - डा. विजय यादव, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी