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मां काली की निकली भव्य शोभा यात्रा

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बलिया। सावन माह के अंतिम सोमवारी को महावीर घाट स्थित काली मंदिर से भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जो नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए पुन: अपने-अपने नियत स्थान पर पहुंची। इस दौरान गाजे-बाजे के साथ ही विभिन्न प्रकार की झांकियां निकाली गई। सुरक्षा के मद्देनजर जुलूस के साथ-साथ स्थानीय पुलिस फोर्स चल रही थी। इस दौरान मां काली के जयकारे से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। अंत में मां काली स्थान पर पाड़ा का कान काटकर छोड़ दिया गया।
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नव युवक संघ व मां काली पूजन समारोह के तत्वावधान में सोमवार को महावीर घाट से मां काली की शोभा यात्रा वैदिक मंत्रोच्चार के बाद निकाली गई। शोभा यात्रा महावीर घाट से निकल कर चमन सिंह बागरोड चौराहा होते हुए पशु चिकित्सालय रोड, कासिम बाजार चौराहा होते हुए टाउन हाल रोड, स्टेशन रोड, मालगोदाम रोड, एलआईसी रोड, हनुमानगढ़ी, गुलाब देवी रोड होते हुए पुन: अपने नियत स्थान पर पहुंचा। इस दौरान गांजे-बाजे के साथ ही विभिन्न प्रकार की मां काली समेत अन्य देवी-देवताओं की निकाली गई झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। इस दौरान मां काली के भक्त रास्ता साफ कर रहे थे और पानी से सड़क की सफाई कर रहे थे। तत्पश्चात भक्त फूलों की पंखुडि़यां रास्ते पर फेंक रहे थे जिस पर से मां काली का रथ होकर गुजर रहा था। इस दौरान हजारों की संख्या में भक्तगण मां के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। सुरक्षा के मद्देनजर भारी मात्रा में फोर्स जुलूस के साथ चल रही थी।
रतसर। समीपवर्ती गांव मसहां में मां काली सेवा समिति के तत्वावधान में श्रावण पक्ष में होने वाली परम्परागत काली पूजा सोमवार को हुई। पूजा पूर्व ग्रामवासियों द्वारा शोभायात्रा निकाली गई जो प्राथमिक विद्यालय, शिव मंदिर होते हुए मां काली के स्थान पर सम्पन्न हुई। इस दौरान हाथी, घोड़े जहां जुलूस की शोभा बढ़ा रहे थे, वहीं मां की जयकारे से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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डेढ़ सौ वर्षों से चली आ रही इस पूजा के पीछे मान्यता है कि श्रावण मास शुक्ल पक्ष में काली मां के शक्ति की पूजा की परंपरा डीह, शायर की पूजा से निकली है। इन दिनों मवेशियों और मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों से रक्षा के किए भोजपूरी इलाके में बहरवार की पूजा करने की परम्परा है। अध्यात्मवेता पं. रामचन्द्र मिश्र ने बताया कि यह सांस्कृतिक परम्परा है जिसमें महिलाएं विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर काली मां के निकट के मन्दिर में पूजा करने जाती है। पं. राजेश कुमार मिश्र की देखरेख में पं. रोहित कुमार ने विधि-विधान से काली मां की पूजा एवं हवन का कार्यक्रम संपन्न कराया। रतसड़ कलां स्थित मां काली मंदिर में भी सावन के आखिरी सोमवार को विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। संगीतमय अखंड हरिकीर्तन हवन के साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में बृजमोहन मिश्र, कमलाकर मिश्र, राधा कृष्ण मिश्र, मंगल देव पांडेय, सर्वानन्द तिवारी, आशीष मिश्रा, अच्छे लाल ठाकुर, योगेन्द्र ठाकुर, अमरनाथ आदि लोग शामिल रहे।
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