रेवती। शुक्रवार की रात तेज हवाओं के साथ हुई बरसात में मक्का तथा धान की फसलों का काफी नुकसान हुआ है। इससे किसानों की कमर टूट गई है। इससे क्षति से किसान मायूस हो गए हैं।
नगर रेवती के चतुर्दिक मौजाओं से संबंधित किसानों का कहना है कि गिर चुकी फसलों के उठने की कोई उम्मीद नहीं है। बताया खेतों में पानी जमा होने तथा जमे पानी के शीघ्र नहीं निकलने के चलते फसलों के सड़ जाने का खतरा है।
नगर के उत्तर स्थित भैंसहां मौजा में राणा योगेंद्र सिंह मांडलू, हीरा सिंह आदि की धान की लगभग 50 बीघा फसल खेत में गिरकर नष्ट हो गई। वहीं, मरौटी, लमुही आदि मौजाओं में खड़ी धान तथा मक्का की फसलें खेतों में पसरी पड़ी हैं। इससे धान तथा मक्का की फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। मांडलू सिंह ने मांग किया है कि देवपुर रेगुलेटर के फाटकों को यथा शीघ्र खोला जाय, जिससे क्षेत्र में जमा पानी जल्द निकल जाय। पानी निकल जाएगा तो फसलों के कुछ प्रतिशत बचने की उम्मीद है।
उधर, नगर के किसान प्रवीण ओझा ने बताया की नगर के दक्षिण स्थित बिशनपुरा, गायघाट, खदरा, अराजी माफी बिशनपुरा, कामता आदि मौजाओं के सैकड़ों बीघा खेतों में बरसाती पानी जमा पड़ा है। हवाओं के थपेड़ों से क्षेत्र में उगी धान की फसलें खेतों में जमे पानी में गिर गई हैं। पानी निकलने का एकमात्र रास्ता पैनी नाला है। बरसात के पूर्व नाला के साफ नहीं किए जाने के चलते बरसाती पानी खेतों में ही जमा पड़ा है।
किसानों का मानना है कि पानी में डूबीं फसलें तो सड़ जाएंगी लेकिन यदि पानी जल्द निकल जाए तो गिरी फसलों में ऊपरी परत की कुछ फसलों के बच जाने की उम्मीद है। चौबे छपरा, छेड़ी, कंचनपुर से लेकर लक्ष्मीपुर तक खेतों में पानी भरा है। किसान वीरेश तिवारी, शंकर दयाल उपाध्याय, ब्रजेश सिंह, जय प्रकाश आदि की भी फसलों को खेतों में गिरने से व्यापक क्षति हुई है।