जयप्रकाश नगर। पुरवइया हवा के सहयोग से घाघरा की लहरों ने अपना तांडव शुरू कर दिया है। एक सप्ताह में घाघरा ने चार किमी की दूरी में 10 किसानों के 11 एकड़ कृषि योग्य भूमि को अपने आगोश में ले लिया और कटान अब भी जारी है।
विकास खंड मुरली छपरा क्षेत्र के चांद दियर गांव के पूरब व दक्षिण दिशा की तरफ घाघरा नदी वर्षों से बहा करती है। गाव के बुजुर्ग विश्व नाथ गोंड, राजगृही यादव, सूचित यादव, राम बचन यादव, भिखम यादव आदि की मानें तो वर्ष 1975 में घाघरा ने इस कदर कहर बरपाया था कि इन लोगों के घर तक को अपने आगोश में ले लिया था। इसके बावजूद सरकार द्वारा चांददीयर पंचायत के चांददीयर प्लाट के लिए कोई मदद नहीं की गई थी। पुन: घाघरा नदी ने हम वाशिंदों को बेबश समझ हमारे गांव को छोड़कर वापस हो गयी थी और करीब ढाई किलोमीटर दूर चली गई।
हमलोगों का जीवन समान्य चलने लगा। लेकिन फिर वर्ष 2011 में घाघरा ने अपना रुख गांव की तरफ कर दिया इसके बाद से ही लगातार कटान जारी है। बुजुर्गों की मानें तो इस पंचायत में स्थित क्षेत्र के कई गांवों के दर्जनों किसानों के करीब 300 एकड़ कृषि योग्य भूमि को अब तक घाघरा अपने आगोश में ले चुकी है। एक सप्ताह से पुरवईया हवा के सहयोग से घाघरा की लहरें तबाही मचा रही है लगातार कटान कर रही है।
जयप्रकाश नगर। क्षेत्र के किसान सुरेश सिंह, महेश्वर सिंह, उपेन्द्र सिंह, महादेव यादव, पुरुषोत्तम सिंह, चंद्रदेव यादव, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि वीरेंद्र यादव आदि ने बताया कि वर्ष 2010-11 से आज तक बचाव के नाम पर इस पंचायत के लिए शासन प्रशासन द्वारा कुछ भी नहीं किया गया। बताया कि जो स्थिति नदी की बनी हुई है और यह बरकरार रहा तो घाघरा एक बार फिर वर्ष 1975 की कहानी दोहरा सकती है। लेकिन इस बार गांव को छोड़कर बीएसटी बांध की तरफ तेजी से बढ़ रही है। अगर नदी की यही गति रही तो बीएसटी बांध के करीब पहुंचने में बहुत समय नहीं लगेगा।