बलिया। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफ्लाइटिस आदि संचारी रोगों से बचाव के लिए वार्डों में फागिंग और छिड़काव कराया जा रहा है। इसके अलावा सात हजार लोगों को अबतक जागरूक किया जा चुका है। लोगों को संचारी रोगों से बचाव के लिए एहतियात बरतने की जानकारी दी जा रही है।
मच्छरों का लार्वा खत्म करने के लिए जलभराव वाले स्थानों, नालियों में कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जा रहा है। जापानी इंसेफ्लाइटिस के वाहक सूअर बाड़ों को चिह्नित कर उन्हें आबादी से दूर किया जा रहा है। ये बातें कार्यवाहक जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. नीलोत्पल कुमार ने कहीं।
उन्होंने बताया कि नगर पालिका के सहयोग से अभी तक शहरी क्षेत्र में वार्ड नंबर 1 से लेकर 20 जुलाई तक फॉगिंग एवं छिड़काव का कार्य संपन्न हो चुका है। बाकी बचे पांच वार्डों में छिड़काव का कार्य हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां जेई, एईएस के रोगी पाए गए हैं। वहां पर रोस्टर बनाकर जिला मलेरिया कार्यालय की टीम द्वारा लार्वीसाइड छिड़काव एवं फागिंग कराया जा रहा है। पोस्टर, हैंडबिल के जरिये बचाव के लिए प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। अभियान 31 जुलाई तक चलाया जा रहा है। अभियान के तहत लगभग 7000 लोगों को जागरूक किया जा चुका है। अभी तक 539 जलभराव वाले पात्रों (कूलर, फ्रीज, सीमेंट की टंकी) में एकत्रित जल का निस्तारण किया जा चुका है। बुखार पीड़ितों की मलेरिया जांच के लिए 376 रक्त पट्टीकाएं बनाई जा चुकी हैं। अभी तक ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति (वीएचएसएनसी) के माध्यम से गांव में प्रधानों और आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से 232 ग्राम पंचायतों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया जा चुका है।
डेंगू रोगियों के इलाज को अस्पतालों में बेड आरक्षित
डॉ. नीलोत्पल ने बताया कि डेंगू के मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में 10, प्रत्येक सीएचसी में पांच-पांच और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दो-दो बेड आरक्षित कराए गए हैं। अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित करके पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जा रहा है। जापानी इंसेफ्लाइटिस का वाहन सूअर है। आबादी से बाहर सूअर बाड़े स्थानांतरित कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से सहयोग लिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र/ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से जलभराव वाले स्थानों एवं नालियों में छिड़काव कराया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पीने का पानी उबालकर प्रयोग में लाने की सलाह दी जा रही है। नगरीय क्षेत्र के अंतर्गत आम लोगों को क्लोरीन युक्त पानी उपलब्ध कराने के लिए नगर पंचायत एवं नगर पालिका परिषद के अधिकारियों से आग्रह किया गया है।