मसाला और शहद में मिलावट कर दोगुना मुनाफा कमा रहे धंधेबाज, लोगों की सेहत से कर रहे खिलवाड़
संवाद न्यूज एजेंसी
बलिया। मिलावट करने वालों ने हर सामान में लागत से ज्यादा मुनाफा कमाने का धंधा खोज लिया है। मसाला, शहद में मिलावट कर धंधेबाज दोगुने लाभ कमा रहे हैं। मसाला बाजार के जानकारों का कहना है कि चीन से आए एक पौधे की छाल एकदम दालचीनी जैसी दिखती है। इसकी पहचान आम आदमी नहीं कर सकता है। मसालों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली हल्दी, मिर्च, धनिया, काली मिर्च, जीरा में अत्यधिक मिलावट की जा रही है।
मिर्च पाउडर में भी हानिकारक रंग की मिलावट होती है। अरारोट में तो महक होती नहीं, लिहाजा उसमें हींग की खुशबू वाला रसायन मिला दिया जाता है। इस मिलावट से हींग बहुत उम्दा किस्म की मालूम पड़ती है, लेकिन कुछ समय बाद रसायन की महक उड़कर खत्म हो जाती है, लेकिन उसका नुकसान बरकरार रहता है।
दक्षिण भारत से आने वाली एक घास को जीरा में मिला देने पर उसमें असली जीरा पहचान करना बेहद मुश्किल होता है। कोरोना काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए घर-घर दालचीनी, शहद आदि का प्रयोग बढ़ने के बाद इसके चलते बाजार में कुछ मसालों की मांग कई गुना बढ़ गई। व्यापारी बताते हैं कि कोरोना काल से पहले दालचीनी की खपत कम होती थी जो अब बढ़ गई है। इसी तरह शहद की खपत भी कई गुना बढ़ गई है। अदरक की मांग भी है। सबसे बड़ा धंधा दालचीनी को लेकर चल रहा है। दाल चीनी का आयात वियतनाम से होता है, लेकिन बढ़ी हुई डिमांड नेपाल के रास्ते पूरी हो रही है।
थोक में असली दालचीनी 600 रुपये किलो से अधिक के भाव बिकती है, जबकि नकली दालचीनी 250 से 300 रुपये प्रति किलो के भाव आती है। चीन के बिलीलीफ पौधे की छाल एकदम दालचीनी जैसी होती है।
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लाल मिर्च पाउडर की ऐसे करें पहचान
बाजार जानकारों के अनुसार, लाल मिर्च पाउडर और हल्दी में कृत्रिम रंगों की मिलावट की जाती है। एक गिलास पानी में एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर या हल्दी मिलाएं। शुद्ध लाल मिर्च पाउडर कांच के तले में डूब जाएगा, जबकि मिलावटी पानी पर तैर जाएगा। इसी तरह शुद्ध हल्दी पानी में डूब जाएगी। जबकि मिलावटी हल्दी पानी को पूरी तरह पीला कर देगी। काली मिर्च को पानी में मिलाते हैं, तो केवल वास्तविक शुद्ध काली मिर्च ही बर्तन के तल पर बैठेगी, जबकि अन्य पानी की सतह पर तैरेंगे। थोड़ी सी हींग को कूटकर पानी में घोल लें। अगर, हींग पानी में बिना कोई रंग छोड़े घुल जाए तो वह शुद्ध है। पानी में शुद्ध नमक मिलाने से कोई तलछट या धुंधलापन नहीं रहेगा। ऐसा नहीं है, तो नमक में चाक मिला हुआ है।
सामान्य परीक्षण से कर सकते हैं पहचान
जानकारों के मुताबिक दालचीनी की तरह ही शहद में भी मिलावट का बड़ा खेल है। शहद की डिमांड हर घर में है, जबकि प्रदूषण के चलते शहद का उत्पादन कम हो रहा है। इसकी आपूर्ति भी केमिकल से ही हो रही है। बाजार में फ्रक्टोज मुक्त एक सीरप मिलता है, जिसमें चीनी मिला देने पर उसका रंग और स्वाद बिल्कुल असली शहद जैसा हो जाता है। सामान्य परीक्षण से इसे पहचान नहीं सकते। सूत्रों की माने तो धंधेबाजों ने ऐसे शहद को शीशी में पैक करके बाजार में उतार दिया है।
दो वर्ष में 278 नमूने मिले थे असुरक्षित
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 2023-24 में प्रवर्तन की कार्यवाही में 1307 खाद्य पदार्थ के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 200 प्रतिष्ठानों पर छापा मारा था। इस दौरान 226 नमूने संग्रहित हुए थे, जिसमें 240 नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इसमें 112 अधोमानक, 30 मिथ्याछाप और 24 की रिपोर्ट असुरक्षित की है। जबकि 166 नमूने मानक के अनुरूप नहीं पाए गए है। एओ कोर्ट में कुल 224 वाद दायर किए गए है। जिसमें 147 वादों को निस्तारित करते हुए 30 लाख 54 हजार रुपए अर्थदंड लगाया गया था। जबकि अप्रैल 2024 तक प्रवर्तन की कार्यवाही करते हुए विभागीय टीम ने 1393 खाद्य पदार्थ की दुकानों के निरीक्षण किए गए। इस दौरान 236 छापे मारे गए। इसमें 268 नमूने लिए गए। जिसमें 160 नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हुआ है। इनमें 83 अधोमानक, 12 असुरक्षित मिथ्याछाप के 17 की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। रिपोर्ट के आधार पर एओ कोर्ट में 96 व न्यायिक न्यायालय में 22 वाद दायर किया गया। प्रवर्तन की कार्यवाही में दायर किए गए वादों में एओ कोर्ट से कुल 134 वाद निर्णित किए गए, जिसमें 15 लाख 30 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया था।
मिलावटी शहद व दालचीनी से कोई फायदा नहीं होगा। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के बजाय घटने लगेगी। आयुर्वेद में मसालों का उपयोग औषधि के रूप में होता है। खाद्य सामग्री को लेकर सचेत रहने की जरूरत है।
-डॉ.आनंद सिंह कुशवाहा, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी,बलिया।खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर जांच कर नमूना लिया जाता है। ऐसे मामले अभी सामने नहीं आए हैं। जांच के दौरान कारोबारियों को जागरूक भी किया जाता है।
-डीके राय, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, बलिया।