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नगर पालिका के पास बजट का टोटा, वेतन पर संकट 18-06-43

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शहर के विकास का जिम्मा संभालने वाली नगर पालिका का खजाना खाली है। न विकास के लिए बजट है न ही अधिकारी कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए मौजूदा समय में नगर पालिका की तंगहाली से अफसरों- कर्मचारियों का के वेतन भुगतान पर भी तलवार लटक रही है। नगर पालिका में नियमित, शासन संविदा, आउटसोर्स मिलाकर करीब 500 अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं। हर माह राज्य वित्त से मिलने वाली धनराशि से इन्हें वेतन व मानदेय भुगतान होता है।
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नगर पालिका को प्रतिमाह वेतन, पेंशन मद में 1.45 करोड़ खर्च करना पड़ता है। कोराना काल शुरू होते ही शासन की ओर से राज्य वित्त में लगातार कटौती की जा रही है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के अप्रैल माह में राज्य वित्त मद में पालिका को 1.15 करोड़ धनराशि प्राप्त हुई थी। वेतन भुगतान में जो कमी थी उसे बोर्ड फंड से पूरा किया गया। अप्रैल के बाद से माहवार कटौती अधिक होती जा रही है। सितंबर माह में नगर पालिका को राज्य वित्त से 74 लाख की धनराशि प्राप्त हुई है। जो आवश्यकता से 71 लाख कम है।
पहले जब भी राज्य वित्त में धनराशि कम पड़ती थी तो नगर पालिका बोर्ड फंड मिलाकर अपने अधिकारियों व कर्मचारियों का वेतन, पेंशन भुगतान कर देती थी। इस बार 71 लाख की कमी पूरी करना बड़ी चुनौती है। बोर्ड फंड में महज 15 से 20 लाख धनराशि अवशेष है। कुल धनराशि वेतन और पेंशन भुगतान में खपा दिया जाए तो भी 50 लाख की कमी पड़ेगी।
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पालिका पर पहले से है अधिकारियों-कर्मचारियों का 1.17 करोड़ कर्ज
नगर पालिका अपने अधिकारी और कर्मचारियों की पहले से ही कर्जदार है। नियमित कर्मचारियों का एरियर, अर्जित अवकाश, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, वेतन, पेंशन मिलाकर नगर पालिका पर करीब 1.25 करोड़ का कर्ज है। राज्य वित्त में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण कर्मचारियों की उधारी हर माह बढ़ती जा रही है।
शासन की ओर से राज्य वित्त में लगातार कटौती किए जाने के चलते अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन, पेंशन भुगतान को लेकर संकट खड़ा हो गया है। इस संबंध में जन प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन को अवगत कराया जाएगा।
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-दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका, बलिया।
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