मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। इससे ठंड बढ़ गया है। गत दिनों बारिश के बाद दो-तीन दिनों की धूप से लोगों को राहत मिली थी लेकिन गुरुवार की रात बादलों ने फिर से डेरा डाल दिया आैर ठंडी हवाएं चलने लगीं।
हाड़ कंपा देने वाली ठंड के चलते जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। हालत यह है कि लोग अपने घरों से बाहर नहीं मिल रहे हैं। दिन भर लोग आग के सामने बैठे रहे। वही, लोग अपने घराें से बाहर निकले जिन्हें कोई जरूरी काम था।
दिनभर सूर्यदेव भी आंखमिचौली खेलते रहे।
बुधवार से एक बार फिर ठंड ने दस्तक दे दी है। इसका अहसास शुक्रवार को तब हुआ, जब बर्फीली हवाएं लोगों को चूभने लगी। इसका असर रहा कि शाम होते-होते चट्टी-चौराहा सन्नाटा छा गया।
लोग दूकान बंद कर घर चले गए। वही लोग अपनी दूकानों पर बैठे दिखाई दिए जिनका घर नजदीक था या फिर उनके मकान में ही दूकान था। रात तक खुले रहने वाले ढाबा, होटल आदि भी बंद रहे या सन्नाटा पसरा रहा। पूरे दिन लोग जगह-जगह आग के पास बैठे रहे।