बलिया। नगर पालिका और जिला खाद्य सुरक्षा विभाग में तालमेल न होने और दुकानदारों की ओर से मानक पूरा न किए जाने के कारण मांस की दुकानों का लाइसेंस जारी नहीं हो पा रहा है। नगर पालिका का कहना है कि पहले जिला खाद्य सुरक्षा विभाग लाइसेंस जारी करे, तब एनओसी दी जाएगी। खाद्य विभाग का कहना है कि नगरपालिका पहले एनओसी देती है, तब लाइसेंस दिया जाता है। ऐसे में इस समय शहर में चल रही सभी दुकानें अवैध हैं। हालांकि जिला खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से 26 दुकानदारों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है, जो एडीएम कोर्ट में विचाराधीन है। हालात यह है कि नपा व जिला खाद्य सुरक्षा विभाग की उदासीनता के कारण नगर समेत ग्रामीणांचलों में मीट और चिकन की दुकानें धड़ल्ले से चल रही हैं।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही मीट-मुर्गा की दुकानों को लाइसेंस लेने के लिए दिशानिर्देश जारी कर दिए गए थे। इसके बाद पुलिस ने सख्ती से स्लॉटर हाउस एवं मीट-मुर्गा की दुकानों को बंद करवा दिया था, लेकिन किसी भी दुकानदार ने आज तक नगर पालिका से एनओसी एवं खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस प्राप्त नहीं किया है। बाद में नगर पालिका से एनओसी एवं विभाग से लाइसेंस प्राप्त करने का हवाला देते हुए दुकानदारों ने एक-एक कर दुकानों को खोल दिया। नगर में ही करीब 50 से 70 के बीच मीट-मुर्गा की दुकानें संचालित की जा रही हैं। यह दुकानें धार्मिक स्थानों के पास संचालित हो रही हैं। जबकि दिशानिर्देश के मुताबिक किसी भी धार्मिक स्थान से 100 मीटर की दूरी पर इन्हें संचालित होना चाहिए। नगर के विष्णु धर्मशाला रोड स्थित काली मंदिर, गड़वार रोड कटहल नाला के पास स्थित हनुमान मंदिर, महुआ मोड़, मिड्ढा बाजार स्थित शिव मंदिर के पास महज 40 से 50 मीटर की दूरी पर दुकानें संचालित हो रही है। इसी प्रकार, गांवों के चट्टी-चौराहों पर भी संचालित हो रही हैं। इसके बावजूद नगर पालिका एवं खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी उदासीन बने हुए हैं।
लाइसेंस लेने के लिए यह है आवश्यक
प्रदेश सरकार के दिशानिर्देश के अनुसार, मीट-मुर्गा संचालकों को संबंधित नगर पालिका एवं नगर पंचायत से एनओसी लेना अनिवार्य है। दुकान किसी भी धार्मिक स्थान से 100 मीटर दूर होनी चाहिए। दुकान के बाहर प्लास्टिक या बांस का पर्दा लगा होना चाहिए। दुकान के अंदर करीब छह फीट तक टाइल्स लगी होनी चाहिए। इसी प्रकार स्लॉटर हाउस के लिए पशु चिकित्सा विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा तथा उससे भी एनओसी लेनी होगी। ताकि जीव-जंतु काटने से पूर्व पशु चिकित्साधिकारी जांच कर सकें। इसी प्रकार खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस लेना होगा।
किसी भी दुकानदार द्वारा एनओसी प्राप्त नहीं की गई है। अगर वह एनओसी लेने की बात कह रहे हैं तो फर्जी है। शीघ्र ही सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में सघन अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। नगर में एक भी दुकान बिना एनओसी के नहीं चलने दी जाएगी।
- डीके विश्वकर्मा, नपा, ईओ, बलिया
नगर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में चल रही मांस की दुकानों के लिए किसी भी दुकानदार ने लाइसेंस नहीं लिया है। नगर में कोई भी स्लॉटर हाउस नहीं है। लाइसेंस के लिए जो नियम बनाए गए हैं, उसके लिए मानकों को पूरा करने पर ही लाइसेंस जारी किया जाएगा। इसके अलावा, पहले नगर पालिका से एनओसी लेनी होगी। बिना एनओसी और लाइसेंस के 26 दुकानदारों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया है, जो एडीएम कोर्ट में विचाराधीन है।
- महेंद्र कुमार, जिला अभिहित अधिकारी, खाद्य एवं सुरक्षा, बलिया