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लॉकडाउन के बाद जिले में 40 हजार प्रवासियों को मिला रोजगार

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लॉकडाउन के बाद जिले में 40 हजार प्रवासियों को मिला रोजगार
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मनरेगा के तहत जिले में चार लाख 31 हजार से अधिक लोगों को मिला काम
जिले में मनरेगा के 187748 जॉब कार्ड हैं सक्रिय
संवाद न्यूज एजेंसी
बलिया। देश में लॉकडाउन के दौरान मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, अहमदाबाद आदि जगहों पर काम करने वाले जिले के 80 हजार कामगारों ने घर-गांव का रुख किया। उनकी मदद करने को सरकार ने जिले के हर गांवों में मनरेगा कार्य शुरू कराया। इसमें करीब 40 हजार प्रवासियों को रोजगार दिया गया। अब तक जिले में मनरेगा के तहत 4,31,470 लोगों को काम उपलब्ध कराया गया है।
शहरों से लौटने वाले अधिकांश प्रवासियों ने मजबूरी में ही मनरेगा में काम किया क्योंकि उन्हें न तो यह काम पसंद था और न ही मिलने वाली मजदूरी। इसके चलते प्रवासियों ने एक बार फिर शहरों में लौटने का मन बनाया और धीरे-धीरे शहरों की ओर फिर रुख करने लगे हैं। हालांकि अब भी पर्याप्त ट्रेनों का संचालन न होने से उन्हें लौटना मुश्किल हो रहा है। बताया जाता है कि वापस जाने वाले अधिकांश प्रवासी कामगार थे, जो तकनीकी कार्य करते हैं और जहां काम करते थे। वहां से बुलावा आने पर फिर शहर की ओर लौट गए।
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पौने चार लाख परिवारों ने मांगा था जॉब कार्ड
जिले में वर्ष 2020-21 में कुल 377996 परिवारों ने मनरेगा में काम करने के लिए जॉब कार्ड की मांग की। इसके सापेक्ष 310340 परिवारों को जॉब कार्ड जारी किया गया। हालांकि 187748 जॉब कार्ड ही एक्टिव हैं और इसमें अनुसूचित जाति के 35926, अनुसूचित जनजाति के 4877 और अन्य वर्ग के 179168 जॉब कार्डधारक हैं। इन जॉब कार्डधारकों में कुल 219971 मजदूर हैं। इसमें 82223 महिला मजदूर हैं। अब तक 133517 परिवारों के 431470 लोगों को काम उपलब्ध कराया गया है। इसमें 584 मजदूरों को 100 दिनों का रोजगार मुहैया कराया गया है। हालांकि प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मनरेगा मजदूर भुगतान को लेकर चिंतित हैं।
प्रधानों के कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद मनरेगा कार्य प्रभावित नहीं हुआ है। काम करने वाले मजदूरों का भुगतान भी समय से किया जाएगा। कोई भी जॉब कार्डधारक रोजगार सेवक या ब्लॉक कार्यालय में आवेदन देकर कार्य की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा, एसएमएस के जरिए भी काम मांगने की सुविधा है। - डीएन दुबे, प्रभारी उपायुक्त मनरेगा व पीडी, डीआरडीए
मैं लॉकडाउन में मुंबई से घर आया। यहां आने के बाद आर्थिक तंगी के कारण मनरेगा में काम किया और इससे मिले पैसे से ही घर परिवार को चलाया। इसके बाद अनलॉक होने पर मैं मुंबई गया और एक महीना रहकर फिर लौटा हूं, तो मनरेगा में काम करने का मन है ताकि आर्थिक संकट न हो। - संदीप तुरहा, दुर्जनपुर
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कोरोना संक्रमण के दौरान मैं भदोही से घर आया और करीब एक माह तक मनरेेगा में काम किया। मनरेगा से मिले पैसे से कुछ हद तक आर्थिक परेशानी दूर हुई। अब मैं फिर भदोही लौट आया हूं और यहीं मशीनरी का काम कर रहा हूं। - शंभूनाथ वर्मा, दुर्जनपुर
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