फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गंगा की धारा में विलीन हुआ दुबे छपरा रिंग बंधा, ग्रामीणों में मची अफरा तफरी

विज्ञापन
विज्ञापन
बैरिया/दयाछपरा। एनएच 31 से दुबेछपरा, उदई छपरा, प्रसाद छपरा, बुधनचक होते हुए टेंगरही तक जाने वालर रिंग बंधा उदईछपरा के सामने 60 से 70 मीटर की दूरी में गंगा की तेज धारा में विलीन हो गया है। उक्त स्थान पर बंधे का केवल स्लोप बचा है। गनीमत है कि गंगा का जल बंधे के काफी नीचे है अन्यथा उदईछपरा, गोपालपुर, दुबेछपरा व प्रसादछपरा गांव तबाह हो गए होते। अभी भी इन गांवों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है।
विज्ञापन

बंधा कटने की सूचना पर पहुंचे बाढ़ विभाग के अधिकारियों ने वायरक्रेट बनाकर बोरियों में मिट्टी भरकर फेंकवाना शुरू किया ताकि कटान रुक जाए। उधर, सूचना पाकर जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगररौत, पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र नाथ मौके पर पहुंचे और कटान का जायजा लिया। गोपालपुर के प्रधान मनोज यादव, मून्ना यादव समेत कई ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से गांव को बचाने की गुहार लगाई। डीएम ने बाढ़ विभाग के अधिकारियों को मौके पर ही कैंप करने व हर हाल में बंधा बचाने की कवायद करने को कहा। चेताया कि अगर बंधा टूटा तो किसी का बख्शा नहीं जाएगा।
कहा कि अगर बंधे का नव निर्माण हुआ हो और उक्त बंधा बार-बार टूट जाता हो तो ऐसे में तो नियमानुसार एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। कहा कि अगर लगता है ठेकेदार जिम्मेदार है तो अपने स्तर से जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं। यह भी कहा कि किसी ठेकेदार का बकाया नहीं होना चाहिए अगर बकाया है तो समय से पेमेंट होना चाहिए।
विज्ञापन

बार होती रही कोरमपूर्ति
पिछले कई दिनों से गंगा का जलस्तर घटने के बावजूद दुबे छपरा रिंग बंधा के पास कटान होता रहा। कई बार ग्रामीणों ने इसकी सूचना भी बाढ़ विभाग के अधिकारियों को दी लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद बाढ़ विभाग के अधिकारी केवल हरे पेड़ों व बांस को कटान स्थल पर डालकर कोरमपूर्ति करते रहे। आलम यह रहा कि गंगा की बैक रोल धारा बुधवार को अचानक उग्र हो गई और पूरे बंधे को ध्वस्त कर दिया। मौके पर केवल बंधे का स्लोप बचा है। हालांकि संयोग अच्छा है कि गंगा का जलस्तर काफी नीचे है, अन्यथा चार गांवों में बड़े पैमाने पर तबाही होती।
छह साल में तीसरी बार टूटा बंधा
बैरिया। एनएच 31 के करीब टेंगरही तक करीब दो किमी का रिंग बंधा आजादी मिलने के बाद गीता प्रेस ने बनवाया था। पहली बार यह बंधा वर्ष 2013 में और इसके बाद वर्ष 2016 में कटा। तब से अब तक 50 हजार आबादी को बाढ़ व कटान से सुरक्षित करने के नाम पर करोड़ों रुपये का हर साल खेल किया जा रहा है। बीते चार वर्षों में अब तक 40 करोड़ से अधिक खर्च हो गए इसके बावजूद रिंग बंधा कट ही गया। एनएच 31 से दुबेछपरा-उदईछपरा होते हुए टेंगरही को सुरक्षित करने वाले करीब दो किमी तक के रिंग बंधे पर चार वर्षों के अंदर मरम्मत व स्पर निर्माण के नाम पर 40 करोड़ से अधिक रुपये खर्च कर दिए गए लेकिन बाजवूद इसके बंधा को सुरक्षित नहीं रखा जा सका। इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह की शिकायत पर 13 अक्टूबर 2017 को उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव सुधीन्द्र कुमार व इसके बाद जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर जांच कराने का आदेश दिया था लेकिन यह फाइल ठंडे बस्ते में चली गई।
वर्ष 2016 में सरकार ने एनएच 31 से दुबेछपरा-उदईछपरा रिंग बंधा की मरम्मत के लिए नौ करोड़ रुपये दिया था। उक्त धन से जो पूर्व में गंगा नदी के तेज बेग से रिंग बंधे का 20 मीटर हिस्सा कट गया था, उक्त स्थल पर मिट्टी भरने व मरम्मत करना था। उक्त धन भी पानी में बह गया। इसके बाद वर्ष 2017 में सरकार ने इसी रिंग बंधे की मरम्मत व स्पर निर्माण के लिए 29 करोड़ रुपये दिए। लेकिन निर्माण के नाम पर रिंग बंधे के पास से ही मिट्टी निकालकर रिंग बंधे को भर दिया गया। यही नहीं पिचिंग के नाम पर जिओ बैग व बोल्डर में भी जमकर खेल हुआ। इससे पहले भी सवा करोड़, 72 लाख रुपये मरम्मत के नाम पर आते रहे लेकिन कुल मिलाकर धन का बंदरबांट हुआ। जब बाढ़ का समय आता है तो बाढ़ विभाग बचाव कार्य मे जुट जाता है और बाढ़ का समय समाप्त होते ही चुप बैठ जाता है।
बंधा टूटने को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
बैरिया। रिंग बंधा कटने से आक्रोशित उदईछपरा, गोपालपुर के ग्रामीणों ने बंधे पर खड़े होकर शासन-प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि सत्ता बदलता रही लेकिन लूट-खसोट उसी तरह होता रहा। बाढ़ विभाग ने हमारे गांवों को बचाने का प्रयास कम और धन का बंदरबांट करने का प्रयास ज्यादा किया। जब बाढ़ का मौसम आता है तो शासन प्रशासन हरकत में आता है और जैसे ही खतरा टल जाता है चुपचाप बैठ जाते हैं। ऐसे में चार वर्षों में 40 करोड़ रुपये हमें बचाने के नाम पर लूट लिए गए। इस मौके पर वीरेन्द्र पाल, प्रभुदयाल तिवारी, दुर्गाशंकर पांडेय, लाल साहब चौधरी, मुन्ना पाण्डेय, चंदन पांडेय, राजेश मौर्य, सचिन सिंह, निर्मल चौबे आदि रहे।
उदईछपरा के कई लोगों ने खाली किया घर
दयाछपरा। रिंग बंधा के टूटते ही उदईछपरा के लोग गांव छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की ओर जाने लगे हैं। बासदेव उपाध्याय, भरत उपाध्याय, प्रेमशंकर उपाध्याय, सत्यदेव सिंह, राम परसन सिंह आदि ने अपने घर खाली कर दिए। इन लोगों का कहना है कि अगर गंगा का पानी बढ़ाव पर होता तो अब तक ग्राम सभा गोपालपुर से लगायत आंशिक दया छपरा, ग्राम सभा जगदेवा तक पलायन होने को लोग मजबूर हो जाते। ग्रामीणों की माने तो जिस समय बंधा बनाया गया उसी समय अगर अगर इसे यहां से हटकर उत्तर बांधा गया होता तो कुछ हद तक कटान रोका जा सकता था। बंधा टूटने की खबर सुनते ही अमरनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुबेछपरा, व पीएन इन्टर कालेज दुबेछपरा के अधिकारी व कर्मचारी अपनी रिकॉर्ड को सुरक्षित करने में लग गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें