नरही(बलिया)। मोक्ष दायिनी गंगा केवल पाप नाशिनी ही नहीं लोगों के पेट की आग भी बुझाती है। वहीं मछुआरों के लिए आजीविका के साधन के साथ ही किसानों के खेतों की सिंचाई भी बड़े पैमाने पर गंगा नदी के पानी से की जाती है। गंगा नदी में आमदनी का एक नया तरीका देखने को मिला आधा दर्जन युवक गंगा नदी में श्रद्धालुओं द्वारा एक, दो और पांच रुपए के सिक्के जो पानी में डालते हैं उसको चुंबक के सहारे निकाल ले रहे हैं। जिससे आधा दर्जन परिवारों की घर की गाड़ी चलती है।
यह काम उजियार गंगा तट एवं यूपी-बिहार सीमा स्थित वीर कुंवर सिंह सेतु के नीचे आधा दर्जन नाविकों द्वारा हर रोज निकाला जाता है। इनकी हर रोज की कमाई पांच सौ रुपए से लेकर सात सौ रुपए तक की हो जाती है। यह नाविक एक छोटे डंडे में दर्जनों चुंबक बांधकर गंगा नदी में रस्सी के सहारे डालकर नदी में पड़े सिक्के को आसानी से निकाल लेते हैं यह रोजमर्रा का काम है। उजियार निवासी अनिल मल्लाह ने बताया कि उजियार और भरौली के आधा दर्जन युवक हर रोज नाव के सहारे गंगा नदी में डाले गए एक, दो और पांच रुपए के सिक्के चुंबक के सहारे निकालते हैं और हम लोगों की आमदनी 500 से सात सौ रुपए की हो जाती है।
बता दें कि यूपी और बिहार को जोड़ने वाला वीर कुंवर सिंह सेतु पर हर रोज हजारों की संख्या में वाहनों का आवागमन होता है। उस पर आने जाने वाले यात्री बड़े पैमाने पर गंगा नदी में चढ़ावे के रूप में सिक्के डालते हैं जो इन नाविकों के लिए आजीविका का साधन भी बन गया है।