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बलियाः बाढ़ की आशंका से तटवर्ती लोगों के होश उड़े, चौकी सक्रिय रखने का दावा, कर्मचारियों का पता नहीं

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बलिया। जनपद में नदियों के जलस्तर का बढ़ने का क्रम जारी है। गंगा और सरयू के जलस्तर में रोज वृद्धि हो रही है। इससे संभावित बाढ़ को लेकर तटवर्ती इलाकों के ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई है। प्रशासन की ओर से बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखने की बात ही जा रही है, लेकिन कर्मचारी नदारद हैं।
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केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर रविवार की शाम चार बजे 54.750 मीटर दर्ज किया गया। प्रति घंटा दो सेंटीमीटर का बढ़ाव बना हुआ है। यहां खतरे का निशान 57.615 मीटर हैं।
लगातार बढ़ाव से किनारों के लोग सहमे हुए हैं। वहीं, पिछले कई दिनों तक सरयू नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रहने के बाद बेल्थरोड में 48 घंटे से नदी की प्रकृति में स्थिरता बनी हुई है। जलस्तर स्थिर होने से बाढ़ की संभावना फिलहाल टल गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार से जल स्तर 64.140 मीटर पर स्थिर हो गया। लाल निशान 64.010 मीटर है। रविवार की शाम तक जलस्तर स्थिर रहा। आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में कमी होने का पूर्वानुमान किया है। नदी का पानी अभी भी लाल निशान से 13 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। नदी की प्रकृति में अप्रत्याशित परिवर्तन से तटवर्ती दर्जनों ग्रामों के हजारों लोग बाढ़ के खतरे को लेकर सशंकित हैं। चांदपुर और मांझी में सरयू के जलस्तर में बढ़ाव बना हुआ है। चांदपुर में खतरा बिंदु 578 मीटर से सरयू नदी पांच सेमी ऊपर बह रही हैं। मांझी में अभी नदी खतरा बिंदु से नीचे हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी भरना शुरू हो गया है।
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वहीं, सिकंदरपुर के खरीद घाट के तरफ सरयू का दबाव बढ़ता जा रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से कटान जारी है। फिर भी लोग अपनी जान को जोखिम में डाल कर यात्रा करने को मजबूर है। खरीद दरौली के मध्य पक्का पुल का निर्माण होना है। इसमें 16 खम्भे खड़े कर दिए गए हैं। नदी में पानी आ जाने से कार्य बाधित है। रोजाना लोग इस रास्ते स्टीमर से बिहार जाते हैं। लोगों का कहना है कि इस रास्ते से जाने से 80 किमी की दूरी 10 किमी में बदल जाती है। बारिश का एलर्ट जारी है फिर भी बेरोकटोक के नाव का संचालन बड़ी घटना को दावत दे रहा है। बाढ़ विभाग के किसी भी कर्मचारी का घाट पर कोई अता पता नहीं है।
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