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बेटियों का आगे निकलना महिला सशक्तिकरण का प्रत्यक्ष उदाहरण

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जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल/कुलाधिपति आनन्दी बेन पट - फोटो : BALLIA
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बलिया। शिक्षा समाज और राष्ट्र की रीढ़ होती है। शिक्षा की शक्ति से सरकार भली भांति परिचित है। सरकार उच्च शिक्षा में बदलाव व नवाचार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। पाठ्यक्रम से लेकर शिक्षा के आधारभूत ढांचे तक में मूलभूत बदलाव किए जाएं ताकि युवाओं को वैश्विक चुनौतियों व सामाजिक समस्याओं के समाधान करने योग्य बनाया जा सके। हमारी कई गंभीर समस्याओं का समाधान तकनीकी शिक्षा में निहित है। हालांकि यह भी ध्यान रखना होगा कि कहीं इस दौड़ में हम शिक्षा के बुनियादी लक्ष्य से भटक न जाएं। ये बातें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बृहस्पतिवार को जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में अध्यक्षता करते हुए कहीं। कलेक्ट्रेट स्थित बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया, जिसमें 24 बेटियां शामिल रहीं। उन्होंने सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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दीक्षांत समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद टीडी कालेज के संगीत शिक्षक अरविंद उपाध्याय ने विश्वविद्यालय का कुल गीत का गायन किया। इस दौरान राज्यपाल ने कहा कि सबसे अधिक बेटियों ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। यह बदलते भारत में महिला सशक्तीकरण का ज्वलंत उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का जो नारा दिया है, उसका प्रभाव अब सुदूर व पिछड़े क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। जिले के महापुरुषों और साहित्यकारों को याद करते हुए कहा कि बलिया की धरती कोई सामान्य धरती नहीं है। यहां का इतिहास गौरवशाली रहा है। ये पौराणिक ऋषि मुनियों के साथ स्वाधीनता आंदोलन के नायकों की धरती है। यहां के लोगों का सौभाग्य है कि ऐसी धरती पर जन्म लिया है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, आचार्य परशुराम चतुर्वेदी, रघुनाथ शर्मा, केदारनाथ सिंह जैसे ख्यातिलब्ध साहित्यकारों के साथ ही उन्होंने पूर्व पीएम चंद्रशेखर के योगदान को याद किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन परंपरा में शिक्षा को चारित्रिक प्रगति का माध्यम माना गया है। आज पूरी दुनिया भारतीय चिंतन प्रणाली की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। उन्होंने अध्यात्म को शिक्षा का अनिवार्य अंग बनाने की अपील की। उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों से कहा कि कक्षाओं में जीवन समाप्त नहीं होता, बल्कि यहां से शुरुआत होती है। विवेकानंद को उद्धृत करते हुए कहा कि ‘पीछे मत देखो बल्कि आगे देखो‘। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुल गीत के गायन की सराहना की। कहा, कुल गीत में जो कहा गया है यदि उसके दो शब्दों को भी जीवन में उतार लिया जाए तो जीवन सफल हो जाएगा। राज्यपाल ने शादी-विवाह में अन्न-जल की बर्बादी की तरफ भी लोगों का ध्यान आकृष्ट कराया। कहा जितना आवश्यक हो उतना ही थाली में भोजन लेने का संकल्प लें तो 30 प्रतिशत अन्न बचेगा। इसी तरह पानी भी उतना ही लें, जितना पीना है।
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