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Ballia News: 20 दुश्मनों को मारकर बलिदान हुए थे अवनीश

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कारगिल शहीद अवनीश कुमार यादव। फाइल फोटो, परिजन
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जयप्रकाश नगर (बलिया)। कारगिल विजय दिवस पर जब देश अपने वीर सपूतों को नमन कर रहा है। सिताबदियारा के दलेल टोला निवासी कारगिल बलिदानी अवनीश यादव की शहादत के बाद किए गए वादे पूरे नहीं हुए।
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बलिदानी की मां सोमारो देवी ने बताया कि बेटे के बलिदान होने के 26 साल बाद भी बेटे की प्रतिमा, स्मारक द्वार, अस्पताल और विद्यालय का नाम उनके नाम पर रखने की घोषणाएं अधूरी हैं।
कारगिल युद्ध में 4 सितंबर 1999 को 20 दुश्मनों को मारकर बलिदान हुए अवनीश यादव के पिता शिवजी यादव सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष की उम्र में बेटा सेना में भर्ती हुआ था।
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बलिदानी की पत्नी को सरकार की ओर से पेट्रोल पंप आवंटित किया गया, लेकिन अन्य अधिकांश वादे आज भी अधूरे हैं।
शहीद की मां सोमारो देवी का दर्द आज भी कम नहीं हुआ है। वह कहती हैं कि बेटे की शहादत के समय गांव की तस्वीर बदलने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन आज कोई हालचाल पूछने तक नहीं आता।
बलिदानी के भाई रविंद्र यादव और योगेंद्र यादव ने कहा कि कारगिल विजय दिवस पर हर वर्ष अमर उजाला परिवार उनके भाई की शहादत को याद करता है, परिवार का हालचाल लेता है और सम्मान भी देता है। उनका कहना है कि यह परंपरा शहीदों के प्रति समाज की संवेदनशीलता का प्रतीक है। कारगिल के इस अमर वीर की शहादत आज भी युवाओं के लिए देशभक्ति, साहस और सर्वोच्च बलिदान की प्रेरणा बनी हुई है।
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