ग्रामीण विकास अवस्थापना कोष नाबार्ड की ओर से वित्तपोषित रेन वाटर मैनेजमेंट प्रशिक्षण का एक दिवसीय कार्यक्रम किया गया। इसमें विभिन्न विकास खंडों से आए छात्रों को रेन वाटर मैनेजमेंट के संबंध में बताया गया।
नाबार्ड के जिला प्रबंधक राजीव बरनवाल ने भूमि संरक्षण संरचनाओं को सुरक्षित रखने के संबंध में किसानों को जानकारी दी। बरनवाल ने कहा कि बरसात के पानी को हम किस प्रकार सुरक्षित रखें, इस पर सोचने की जरूरत है।
उप निदेशक कृषि टीपी शाही ने भूमि संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रशिक्षुओं से कहा कि खेत की मिट्टी तथा पानी को रोक कर रखें तो हमारा कृषि और उन्नतिशील होगा।
अपने खेत का पानी खेत में और मिट्टी को भी रोककर रखें। कहा कि भूमि संरक्षण के द्वारा ही हम आने वाली पीढ़ियों को खेतीहर जमीन दे सकते हैं। मृदा के कटाव को रोकने के लिए सभी को सोचना होगा।
खेतों की मिट्टी को रोकने के लिए मेड़ पर सरपत जैसे झाड़ी नुमा पौधे लगाने चाहिए। इस मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. वेद प्रकाश सिंह ने ऊसर सुधार पर विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण में जिला कृषि अधिकारी जेपी यादव, सहायक अभियंता लघु सिंचाई महेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार के साथ ही अन्य विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे। संचालन भूमि संरक्षण अधिकारी संजेश कुमार श्रीवास्तव ने किया।